रायपुर 19 नवम्बर 2025 / ETrendingIndia / Excessive and unnecessary use of antibiotics is a serious health crisis – Nadda: Launch of the second edition of NAP-AMR / एंटीबायोटिक दुरुपयोग संकट , केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा और बिना जरूरत उपयोग देश में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अत्यधिक एंटीबायोटिक इस्तेमाल के चलते एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) तेजी से बढ़ रहा है, जो अब वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है।
श्री नड्डा नई दिल्ली में एएमआर (2025-29) के लिए तैयार राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP-AMR) के दूसरे संस्करण की शुरुआत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एएमआर से मुकाबला केवल सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों, फार्मा क्षेत्र और आम जनता की सामूहिक जिम्मेदारी से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि भारत में एएमआर से लड़ाई की शुरुआत 2010 में हुई थी और 2017 में पहली राष्ट्रीय कार्य योजना लॉन्च की गई। अब नए एवं दूसरे संस्करण में निगरानी प्रणाली को मजबूत करने, अस्पतालों में एंटीबायोटिक उपयोग को नियंत्रित करने, कृषि और पशुपालन क्षेत्र में दवाओं के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को बढ़ावा देने तथा जागरूकता कार्यक्रमों को विस्तार देने पर जोर दिया गया है।
नड्डा ने कहा कि कई मंत्रालय इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा चुके हैं, लेकिन यदि तत्काल सुधारात्मक उपाय नहीं किए गए तो एंटीबायोटिक दवाओं पर असर कम होना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन जाएगा।
उन्होंने कहा कि “एएमआर एक बढ़ती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा है, और यदि हम अभी नहीं जागे तो इलाज की प्रभावशीलता पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।”
एंटी बायोटिक दवाओं की जरूरत, उपयोगिता और दुरुपयोग
सागर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ,भोपाल के अधीक्षक डॉ अविनाश अग्रवाल ने बताया कि एंटीबायोटिक दवाएं आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक हैं। इनकी मदद से बैक्टीरिया जनित संक्रमणों का प्रभावी उपचार संभव हुआ है, जिससे लाखों लोगों की जान बचाई जा चुकी है। निमोनिया, क्षतिग्रस्त घाव, मूत्र संक्रमण, टीबी, टाइफाइड जैसे कई गंभीर रोगों में एंटीबायोटिक जीवनरक्षक भूमिका निभाते हैं।
एंटीबायोटिक संक्रमण को फैलने से रोकते हैं और शरीर की प्रतिरक्षा को रोग से लड़ने में सहायता प्रदान करते हैं। सर्जरी, ट्रॉमा या कमज़ोर इम्यून सिस्टम वाले मरीजों में ये उपचार का अनिवार्य हिस्सा हैं। चिकित्सा जगत में इनकी उपस्थिति के बिना कई उपचार असंभव हो जाते।
डॉ अविनाश अग्रवाल ने आगे कहा कि लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक उपयोग, डॉक्टर की पर्ची के बिना खरीदी, गलत डोज़ में सेवन और वायरल बीमारियों—जैसे सर्दी-जुकाम—में इनका अनावश्यक इस्तेमाल बढ़ गया है। इसका परिणाम है एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR), जिसमें बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। इससे संक्रमण का इलाज कठिन हो जाता है और आम दवाएं प्रभावहीन बनने लगती हैं। यह एक गंभीर स्थिति बन जाती है.
क्या करना जरूरी है
समय पर सही दवा, सही मात्रा और सही अवधि तक ही एंटीबायोटिक लेना जरूरी है। स्वयं-उपचार से बचना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना ही जिम्मेदार उपयोग है। साथ ही, जागरूकता बढ़ाना और स्वास्थ्य प्रणाली में निगरानी मजबूत करना भी आवश्यक है।
