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रायपुर / ETrendingIndia / आंतरिक शोध में मिला नकारात्मक प्रभाव का सबूत

Meta सोशल मीडिया नुकसान से जुड़े गंभीर आरोपों का सामना कर रही है। अमेरिकी अदालत में दाखिल नए दस्तावेज़ बताते हैं कि Meta ने अपने ही शोध के कारणात्मक सबूत छुपाए। यह शोध “प्रोजेक्ट मर्क्युरी” के नाम से 2020 में किया गया था।

इस शोध में फेसबुक और इंस्टाग्राम को अस्थायी रूप से बंद करने पर उपयोगकर्ताओं की मानसिक स्थिति का अध्ययन किया गया। परिणामस्वरूप, लोगों ने केवल एक सप्ताह उपयोग बंद करने के बाद कम अवसाद, कम चिंता और कम सामाजिक तुलना महसूस की। हालांकि, Meta ने इन नतीजों को सार्वजनिक नहीं किया।


कंपनी ने नतीजे आगे बढ़ाने से किया इनकार

हालांकि Meta के कुछ कर्मचारी इन निष्कर्षों को सही मानते थे, लेकिन कंपनी ने शोध को रोक दिया। इसके अलावा, Meta ने आंतरिक रूप से दावा किया कि यह नकारात्मक परिणाम “मीडिया नैरेटिव” से प्रभावित हैं।

फिर भी, कर्मचारियों ने निजी तौर पर स्वीकार किया कि नतीजे वास्तविक हैं। एक कर्मचारी ने इसे तंबाकू उद्योग की छुपाई गई जानकारी से तुलना करते हुए गंभीर चिंता जताई।


अदालत में कई गंभीर आरोप दर्ज

नए दस्तावेज़ों में आरोप है कि Meta सोशल मीडिया नुकसान को छुपाकर उत्पादों को सुरक्षित बताती रही। साथ ही, कांग्रेस को यह कहते हुए गुमराह किया कि उसके पास किशोरों पर प्रभाव मापने का कोई तरीका नहीं है।

इसके अलावा, मुकदमे में Meta, Google, TikTok और Snapchat पर बच्चों को लक्ष्य बनाकर उत्पाद बढ़ावा देने, सुरक्षा उपाय कमजोर रखने और जोखिम छुपाने का आरोप है। कुछ दस्तावेज़ बताते हैं कि कंपनियों ने बच्चों के लिए काम करने वाली संस्थाओं को प्रभावित करने की कोशिश भी की।


Meta का बचाव और विवादित दस्तावेज़

Meta ने सभी आरोपों को खारिज किया। कंपनी का कहना है कि शोध पद्धति में खामियां थीं और सुरक्षा सुधार लगातार किए जाते रहे हैं। Meta प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी का प्रयास हमेशा से बच्चों और अभिभावकों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाना रहा है।

दस्तावेज़ अभी सार्वजनिक नहीं हैं। Meta ने इन्हें कोर्ट रिकॉर्ड से हटाने की याचिका लगाई है। इस मामले की सुनवाई 26 जनवरी को कैलिफ़ोर्निया जिला अदालत में होगी।