रायपुर, 15 जनवरी 2026/ETrendingIndia / जैविक मशरूम उत्पादन महिलाएं , जैविक खेती महिलाओं को सशक्त एवं उद्यमी बना रही है. प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दंतेवाड़ा जिला अब जैविक खेती और महिला सशक्तिकरण का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए यहां की महिलाएं अब नकदी फसल के रूप में जैविक मशरूम उत्पादन अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में नए कदम बढ़ा रही हैं।
दंतेवाड़ा जिले में लागू प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना ने विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। इन्हीं प्रगतिशील महिलाओं में ग्राम बड़े कारली की कृषक शकुंतला वैको एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं।
सीमित संसाधनों में जीवनयापन वाली वैकों ने प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मशरूम उत्पादन को अपनी मुख्य आजीविका के रूप में अपनाया और जैविक पद्धति से करने का निर्णय लिया।
शकुंतला बताती हैं आज वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। दंतेवाड़ा का जैविक मशरूम वहाँ की स्वच्छ जलवायु के कारण रसायन- मुक्त,प्रोटीन व विटामिन से भरपूर तथा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है। स्थानीय बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है ।
सरकारी सहयोग से बनी सफल उद्यमी
शकुंतला की उपलब्धि बताती है कि सही प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं का सहयोग और स्वयं की मेहनत से दूरस्थ वनांचल की महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। यह मॉडल दंतेवाड़ा में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण है।
ताज़ा जैविक मशरूम स्वास्थ्यवर्धक
उपभोक्ता अपने भोजन में ताज़ा और स्वास्थ्यवर्धक जैविक मशरूम शामिल करना चाहते हैं, वे कृषि विभाग या कृषक शकुंतला वैको, ग्राम बड़े कारली से संपर्क कर सीधे खेत से उपलब्ध जैविक मशरूम प्राप्त कर सकते हैं।
