Poet Pandit Janardan Sharma Memorial Award Ceremony
Poet Pandit Janardan Sharma Memorial Award Ceremony
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रायपुर 20 जनवरी 2026/ ETrendingIndia / Poet Pandit Janardan Sharma Memorial Award Ceremony: Senior litterateur Ramnarayan Rathore honoured / जनार्दन शर्मा स्मृति सम्मान , सुकवि पंडित जनार्दन शर्मा स्मृति सम्मान समारोह उनकी 47 वीं पुण्य तिथि पर सीहोर के रैंबो प्ले स्कूल में आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व नपा अध्यक्ष, जिला प्रेस क्लब अध्यक्ष और दैनिक राजधानी के पास समाचार पत्र के प्रधान संपादक श्री राकेश राय थे।

श्री राय ने कहा कि सीहोर अपने शहर के बुजुर्गों और सभी क्षेत्र की प्रतिभाओं का सम्मान करने में अग्रणी रहा है। यह आयोजन करने के लिए मैं अंबादत्त भारतीय स्मृति संग्रहालय और शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष रघुवर दयाल गोहिया और अभा साहित्य परिषद के जिला अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र जायसवाल को साधुवाद देता हूं।

विद्रोही कवि थे जनार्दन शर्मा

स्व. जनार्दन शर्मा के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से जानकारी रघुवर दयाल गोहिया ने दी। उन्होंने कहा कि जनार्दन शर्मा स्वभाव से जुझारू और संघर्षशील व्यक्ति थे। उनकी रचनाओं में भी यही जुझारूपन, विद्रोह और संघर्ष करने की धार नजर आती है। वे प्रवासी परिंदे की तरह अकेले उत्तरप्रदेश के एक छोटे से गांव से यहां आए और यहीं के होकर रह गए। इस शहर ने उनके नहीं रहने के बाद उन्हें पहचाना।

कार्यक्रम को जनार्दन शर्मा के मित्र समाजसेवी ओम दीप, हरिओम शर्मा दाऊ, राजकुमार गुप्ता तथा निर्मल पचौरी ने भी संबोधित कर अनेक संस्मरण सुनाए।

शिक्षाविद साहित्यकार रामनारायण राठौर हुए सम्मानित

इस अवसर पर नगर के वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद श्री रामनारायण राठौर को जनार्दन शर्मा स्मृति सम्मान से अतिथियों द्वारा विभूषित किया गया।

काव्य गोष्ठी में कवियों ने सुनाईं अपनी रचनाएं

इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। काव्य गोष्ठी में सर्वश्री रामनारायण राठौर, हरिओम शर्मा, द्वारिका बांसुरिया, विनोद पंसारी, जयमाल सिंह राजपाल, धर्मराज देशराज, त्रिलोचन प्रसाद दुबे, हीरालाल जायसवाल अनाड़ी, ओम दीप, हरिश चंद्र आर्य, जोरावर सिंह, लक्ष्मण सिंह चौकसे, हीरालाल शर्मा, गोविन्द लोवानिया, जितेंद्र नारोलिया, संतोष हिन्दू सनातनी, निर्मल पचोरी, कैलाश चव्हाण, संतोष जैन संतू, डॉ. विजेन्द्र जायसवाल, राहुल ठाकुर आदि ने अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ किया।