Basant Panchami
Basant Panchami
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रायपुर 22 जनवरी 2026/ ETrendingIndia / January 23, ‘Basant Panchami’: The essence of Saraswati and Indian culture in the colors of spring / बसंत पंचमी पर्व ,

मां सरस्वती को समर्पित

भारतीय संस्कृति में वसंत ऋतु केवल मौसम का परिवर्तन नहीं, बल्कि चेतना, सृजन और उल्लास का उत्सव है। शीत की कठोरता के बाद जब प्रकृति नवपल्लवित होती है, खेतों में हरियाली लहराती है और फूलों की सुगंध वातावरण को महकाती है, तब वसंत जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है। इसी नवजीवन और ज्ञान-प्रकाश के प्रतीक रूप में वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है, जो मां सरस्वती—ज्ञान, कला, संगीत और विवेक की अधिष्ठात्री देवी—को समर्पित है। इस वर्ष 23 जनवरी को बसंत पंचमी का पर्व है ।

मां सरस्वती का स्वरूप श्वेतवर्णी, वीणा धारण किए हुए और कमल पर आसीन बताया गया है। श्वेत रंग पवित्रता, शांति और सात्त्विकता का प्रतीक है, जबकि वीणा से निकलने वाला नाद जीवन में संतुलन, अनुशासन और सौंदर्य का संदेश देता है।

यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि सच्चा ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि विचार, व्यवहार और करुणा में प्रकट होता है।

पीताम्बर का महत्व

वसंत पंचमी के अवसर पर भारतीय समाज में विशेष परिधान पहनने की परंपरा है। पीला रंग इस दिन का प्रमुख रंग माना जाता है, जो सरसों के फूलों, सूर्य के प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। महिलाएं पीली साड़ियां या सलवार-सूट पहनती हैं, वहीं पुरुष पीले कुर्ते या अंगवस्त्र धारण करते हैं। यह रंग मन में आशा, प्रसन्नता और सृजनशीलता जगाता है।

विद्यारंभ का पावन दिवस

पूजा-विधि में भी गहरा सांस्कृतिक अर्थ निहित है। घरों, विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा की जाती है। पुस्तकों, वाद्ययंत्रों और लेखन-सामग्री को देवी के चरणों में रखकर विद्या, बुद्धि और विवेक की कामना की जाती है। बच्चे इस दिन विद्यारंभ या अक्षराभ्यास करते हैं, जो शिक्षा की शुभ शुरुआत का प्रतीक है।

पीले पुष्प, केसरिया भोग और मधुर वाणी के साथ की गई आराधना मन और समाज दोनों को संस्कारित करती है।

इस प्रकार वसंत ऋतु और वसंत पंचमी भारतीय संस्कृति में प्रकृति, ज्ञान और मानव मूल्यों के सुंदर संगम का उत्सव है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में प्रगति तभी संभव है जब ज्ञान के साथ विनम्रता, सौंदर्य के साथ अनुशासन और उत्सव के साथ संतुलन बना रहे।