रायपुर 27 जनवरी 2026 / ETrendingIndia / DRDO ने दिखाई नई मारक क्षमता
गणतंत्र दिवस परेड में डीआरडीओ ने अपनी अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन किया। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल की रही। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की समुद्री मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगी। साथ ही यह भारत की स्वदेशी रक्षा शक्ति का बड़ा उदाहरण है।
क्या है हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल की खासियत
यह हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल मैक 10 की रफ्तार से उड़ान भर सकती है। इसके अलावा यह मैक 5 की औसत गति बनाए रखती है। इसकी उड़ान प्रोफाइल कम ऊंचाई वाली होती है। इसलिए दुश्मन के रडार इसे देर से पकड़ पाते हैं। यह स्थिर और गतिमान दोनों लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकती है।
पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार
इस मिसाइल में स्वदेशी एवियोनिक्स और उच्च सटीकता सेंसर लगे हैं। यह दो-चरणीय ठोस ईंधन रॉकेट मोटर से संचालित होती है। पहले चरण के अलग होने के बाद दूसरा चरण इसे गति देता है। अंत में यह ग्लाइड मोड में लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इस प्रकार हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल आधुनिक युद्ध तकनीक का प्रतीक है।
पनडुब्बी तकनीक भी रही आकर्षण का केंद्र
डीआरडीओ की झांकी में ‘नेवल टेक्नोलॉजीज फॉर कॉम्बैट सबमरीन’ थीम भी दिखाई गई। इसमें इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट, वायर गाइडेड हैवी वेट टॉरपीडो और एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम शामिल थे। ये तकनीकें भारतीय नौसेना की पनडुब्बी ताकत बढ़ाती हैं। इसलिए हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल के साथ ये प्रदर्शन भी चर्चा में रहा।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
डीआरडीओ ने कहा कि वह स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उद्योग, अकादमिक संस्थान और सेना के सहयोग से यह मिशन आगे बढ़ रहा है। अंत में, यह कहा जा सकता है कि हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता का बड़ा प्रतीक बनकर उभरी है।
