Grok
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रायपुर 27 जनवरी 2026 / ETrendingIndia / EU के डिजिटल नियम के तहत X पर formal जांच

Elon Musk के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के AI चैटबोट Grok के खिलाफ Grok डीपफेक EU जांच शुरू की गई है। यूरोपीय आयोग ने सोमवार को यह औपचारिक कदम उठाया। जांच का मकसद यह पता करना है कि क्या X ने प्लेटफॉर्म पर खतरनाक और अवैध सामग्री को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाए या नहीं।


डीपफेक कंटेंट को लेकर गंभीर चिंताएं

EU अधिकारियों का कहना है कि Grok की वजह से महिलाओं और बच्चों के सेक्सुअलाइज्ड डीपफेक इमेज बनने और फैलने के मामले सामने आए हैं। इस तरह की गैर-सम्मत छवियां गंभीर डिजिटल शोषण का रूप मानी जाती हैं। ऐसे में Grok डीपफेक EU जांच का केंद्र यही है कि क्या मंच ने इन खतरों को पहले ही पहचान कर रोकने की कोशिश की।


डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत जवाबदेही

जांच यूरोपीय संघ के Digital Services Act (DSA) के तहत हो रही है। यह क़ानून बड़े प्लेटफॉर्म्स पर सख्त जिम्मेदारी लगाता है कि वे अवैध और हानिकारक ऑनलाइन सामग्री को फैलने से रोकें। EU अब जांच करेगा कि X ने कंटेंट जोखिमों का मूल्यांकन किया या नहीं।


X की प्रतिक्रिया और वैश्विक दबाव

X ने पहले कहा है कि वह अवैध सामग्री को हटाने, ज़िम्मेदार लोगों के अकाउंट सस्पेंड करने और कानून लागू करने वाले अधिकारियों के साथ सहयोग करता है। लेकिन EU अब देखेगा कि क्या इसे पर्याप्त माना जा सकता है। वहीं, Grok की विवादित इमेजिंग क्षमताओं के कारण वैश्विक स्तर पर भी आलोचना और जांचें तेज़ हुई हैं।


संभावित नतीजे और आगे के कदम

अगर EU यह पाता है कि X ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसे भारी जुर्माना या बदलाव करने का आदेश मिल सकता है। Grok डीपफेक EU जांच अब अमेरिका समेत कई देशों में AI प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही पर वैश्विक चर्चा को और तेज़ करेगी।