रायपुर 6 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / Dearness allowance is an essential right for employees to lead a dignified life: Supreme Court / महंगाई भत्ता कर्मचारियों अधिकार , सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि महंगाई भत्ता कोई अतिरिक्त लाभ नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मानजनक जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए आवश्यक अधिकार है। इसलिए राज्य सरकार को इसका भुगतान करना ही होगा।
महंगाई भत्ता क्यों जरूरी
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि डीए का उद्देश्य बढ़ती महंगाई के प्रभाव से कर्मचारियों को राहत देना है। यह जीवन-यापन की न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करने का माध्यम है, न कि कोई ऐच्छिक सुविधा।
कानूनी रूप से लागू अधिकार
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब महंगाई भत्ता को वैधानिक नियमों के तहत अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) से जोड़ा गया है, तो राज्य सरकार बाद में कार्यालय ज्ञापन जारी कर इसकी गणना या भुगतान के तरीके को बदल नहीं सकती।
बकाया भुगतान का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह वर्ष 2008 से 2019 की अवधि का बकाया महंगाई भत्ता कर्मचारियों को दे। यह फैसला लाखों राज्य कर्मचारियों को राहत देने वाला है।
आंशिक भुगतान की समय-सीमा
कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य सरकार 6 मार्च तक बकाया डीए का कम से कम 25 प्रतिशत भुगतान करे। शेष राशि के भुगतान के लिए भी उचित कदम उठाने होंगे।
बकाया राशि
वकीलों के अनुसार, राज्य सरकार पर लगभग 41,000 करोड़ रुपये का डीए बकाया है।
