Share This Article रायपुर, 14 फरवरी 2026 / ETrendingIndia / Little Steps, Strong India: The Changing Face of Anganwadi Centres / आंगनबाड़ी केंद्र बदलाव , देशभर के आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल पोषण और देखभाल तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण रोजगार के मजबूत केंद्र बन गए हैं। छत्तीसगढ़ के महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जिलों में यह बदलाव स्पष्ट दिख रहा है। ‘भवन ही शिक्षक’ की नई सोच मनरेगा और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से बने नए भवन ‘बिल्डिंग ऐज लर्निंग एड (BALA)’ मॉडल पर आधारित हैं। करीब 11.69 लाख रुपए की लागत से बने इन केंद्रों की दीवारों, फर्श और सीढ़ियों पर वर्णमाला, अंक, चित्र और सामान्य ज्ञान की जानकारी दी गई है, जिससे बच्चे खेल-खेल में सीखते हैं। धमतरी बना उदाहरण धमतरी जिले में 81 बाला आधारित आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण शुरू हुआ, जिनमें 51 पूरे हो चुके हैं। ग्राम उड़ेंना का केंद्र विशेष रूप से सराहा जा रहा है, जहाँ जनजातीय बच्चे चित्रों और गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा पा रहे हैं। रोजगार और आजीविका को बढ़ावा इन भवनों के निर्माण से ग्रामीणों को मनरेगा के तहत रोजगार मिला है। इससे आय बढ़ी है और पलायन में कमी आई है। पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार आंगनबाड़ी केंद्र अब गर्भवती महिलाओं, माताओं और किशोरियों के लिए पोषण, टीकाकरण और परामर्श का प्रमुख केंद्र बन गए हैं। राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में कदम यह परिवर्तन राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के उद्देश्यों को मजबूत कर रहा है। आज आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों की पहली पाठशाला बनकर सशक्त भारत की नींव रख रहे हैं। Share This Article Post navigation पांच साल में OBC वर्ग से 245 IAS , 255 IPS और 231 IFS बने, सरकार ने संसद में दी जानकारी प्रधानमंत्री : असम के डिब्रूगढ़ में पूर्वोत्तर की पहली आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) का उद्घाटन