Kubereshwar Dham
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रायपुर 20 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / Rudraksha Festival at Kubereshwar Dham in Madhya Pradesh: International storyteller Pandit Pradeep Mishra narrated the story of Shiva. On the final day, the highway was jam-packed with vehicles scurrying./ कुबेरेश्वरधाम रुद्राक्ष महोत्सव , अध्यात्म का मतलब रील बनाना नहीं, बल्कि जीवन की हकीकत में परमात्मा को महसूस करना, भगवान रील बनाने से नहीं, बल्कि अपने ओरिजिनल रोल जीवन की जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाने से मिलते हैं।

कुबेरेश्वरधाम पर आने वाले भक्त अपनी आस्था और विश्वास के बल पर शिव कृपा को प्राप्त करते है। उक्त विचार जिला मुख्यालय के समीपस्थ कुबेरेश्वरधाम पर जारी सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव के अंतिम दिवस अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहे।

भगवान शिव को सादगी, निस्वार्थता और सच्चे भाव से प्रसन्न किया जा सकता है

शुक्रवार को पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव को चमक-दमक, दिखावे या आडंबर से नहीं, बल्कि सादगी, निस्वार्थता और सच्चे भाव से प्रसन्न किया जा सकता है। शिव को भोलेनाथ इसीलिए कहा जाता है क्योंकि वे आडंबर से दूर, शुद्ध प्रेम और भक्ति के भूखे हैं। महादेव अपने भक्तों पर सदा कृपा बरसाते है, हम धरती पर लोगों से प्यार करते हे, इसलिए हमें धोखा मिलता है, ईश्वर से प्रेम करें तो कभी धोखा नहीं मिलेगा।

शिवजी एक लोटा से हमारे कल बदल देंगे। यह निश्चित है, भले ही इसमें थोडा समय लग सकता है, लोटे में जल भरकर मुस्कुराते हुए मंदिर जाएं, चाहे कितनी भी परेशानी क्यों न हो, आपके चेहरे पर भगवान हमेशा के लिए मुस्कान दे देंगे।

अपना संबंध शिव से जोड़ें। यह न समझें कि भगवान नहीं सुनते, वे सबकी सुनते है। नए साल पर एक लोटा जल हर समस्या का हल एक धार्मिक आस्था और सरल उपाय है, जो मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है, जिसका मतलब है कि सच्चे मन और श्रद्धा से चढ़ाया गया एक लोटा जल सभी दुखों और बाधाओं को दूर कर सकता है, जो सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और समर्पण की मांग करता है, ताकि सकारात्मक ऊर्जा से जीवन में सुख-शांति आ सके।

कथा के अंतिम दिवस पंडित प्रदीप मिश्रा ने यहां पर सेवा देने आए हजारों की संख्या में सेवादारों का सम्मान किया। इस मौके पर विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित समीर शुक्ला और पंडित विनय मिश्रा आदि शामिल थे।

कुबेरेश्वर धाम की पावन धरा पर आयोजित सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव और शिव महापुराण कथा का आज श्रद्धा, भक्ति और अटूट विश्वास के साथ भव्य समापन हुआ।

अंतिम दिन लाखों की संख्या में उमड़े श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर नजर आए। कथा के मुख्य वक्ता पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने भक्तों को शिव भक्ति, सदाचार और संस्कारों का मार्ग दिखाया। कथा के अंतिम दिन की शुरुआत पंडित श्री मिश्रा के पुत्र राघव मिश्रा ने भजन और प्रेरक वचनों के साथ की।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने प्रवचन में जीवन के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि इंसान की सुंदरता क्रीम या बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि उसके संस्कारों और शिवभक्ति से होती है। जैसे वृक्ष की सुंदरता फल-फूल से है, वैसे ही मनुष्य की सुंदरता उसके अच्छे कर्मों से है।

व्यसनों (नशे) का पूर्ण त्याग करें

उन्होंने युवाओं और श्रद्धालुओं से भावपूर्ण अपील की कि वे व्यसनों (नशे) का पूर्ण त्याग करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान शिव या किसी भी देवी-देवता ने कभी नशा नहीं किया, अत: सच्ची भक्ति का मार्ग संयम और सदाचार का है।

कुबेरेश्वर धाम की महिमा

पंडित जी ने कहा कि यह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भक्तों के लिए ‘पिता का घरÓ (मायका) है। यहाँ की मिट्टी (रज) और कंकड़ में भी शंकर का वास है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जो यहाँ से दिल से मांगकर जाएगा, बाबा उसकी झोली अवश्य भरेंगे।

कथा में 12 ज्योतिर्लिंगों के प्राकट्य और माता पार्वती द्वारा शिव के विभिन्न रूपों को पहचानने की कथा का वर्णन किया गया। पंडित जी ने कुबेरेश्वर धाम को शिव के 13वें रूप के समान कल्याणकारी बताया।

रुद्राक्ष वितरण आगामी 15 मार्च से

समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि शुक्रवार को रुद्राक्ष महोत्सव का भव्य समापन किया गया है। इस मौके पर सात दिवसीय शिव महापुराण का श्रवण करने के लिए करीब 25 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे, अंतिम दिवस 10 से 12 लाख श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया .

प्रशासन ने पूरी मुस्तैदी के साथ लौट रहे श्रद्धालुओं को सकुशल वापसी कराई। उन्होंने बताया कि आगामी 15 मार्च से रुद्राक्ष वितरण आरंभ किया जाएगा। धाम से लौटने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुबह से भोजन प्रसादी का इंतजाम नगर विठलेश सेवा समिति की नगर ईकाई ने रेलवे स्टेशन पर किया था।