Saluting like a guard
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रायपुर ,22 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / Saluting like a guard, sidelined in group photos… Pak PM deeply embarrassed at Trump’s Board of Peace meeting / शहबाज शरीफ ट्रंप बैठक विवाद , पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की हालिया अमेरिका यात्रा कूटनीतिक सफलता के बजाय उनके लिए सार्वजनिक शर्मिंदगी का कारण बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीसÓ की पहली बैठक में शरीफ के हाव-भाव और वहां घटी घटनाओं ने सोशल मीडिया पर मीम्स और तीखी आलोचनाओं का तूफान ला दिया है।

इस दौरे का सबसे चर्चित और विवादित पल वह रहा, जब एक वायरल वीडियो में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ राष्ट्रपति ट्रंप को किसी सुरक्षा गार्ड की तरह अजीबोगरीब अंदाज में सैल्यूट करते हुए नजर आए। इस वाकये के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की जमकर जग हंसाई हो रही है।

कूटनीतिक मर्यादा तार-तार, ग्रुप फोटो में भी किया गया किनारे

इस वीडियो के सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों ने इसे पाकिस्तान की संप्रभुता और कूटनीतिक मर्यादा के बिल्कुल विपरीत करार दिया। आलोचकों का स्पष्ट रूप से मानना है कि एक संप्रभु देश के प्रधानमंत्री का किसी दूसरे राष्ट्राध्यक्ष के सामने इस तरह झुकना दोनों देशों के बीच बेहद असंतुलित और कमजोर संबंधों को उजागर करता है।

बात सिर्फ अजीबोगरीब व्यवहार तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि बैठक की आधिकारिक तस्वीरों ने भी वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की वास्तविक हैसियत की पोल खोल दी।

दुनिया भर के नेताओं के साथ लिए गए ग्रुप फोटो में जहां डोनाल्ड ट्रंप अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ बीच में खड़े थे, वहीं शहबाज शरीफ को बिल्कुल किनारे पर खड़ा किया गया था। कूटनीतिक विशेषज्ञ इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस्लामाबाद के पूरी तरह से हाशिए पर चले जाने का प्रतीक मान रहे हैं।

शहबाज शरीफ को खड़े होने का निर्देश

बैठक के दौरान एक और असहज कर देने वाला क्षण तब देखने को मिला जब ट्रंप ने अपने भाषण के बीच में ही शहबाज शरीफ की तरफ इशारा करते हुए उन्हें अपनी जगह पर खड़े होने का निर्देश दे दिया। इस दृश्य ने पाकिस्तान के विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स को सरकार पर हमलावर होने का बड़ा मौका दे दिया और कई लोगों ने तो शरीफ को ‘ट्रंप की कठपुतलीÓ तक कह डाला।

हालांकि, ट्रंप ने मजाकिया लहजे में यह भी कहा कि उन्हें यह शख्स पसंद है, लेकिन इस हल्के-फुल्के बयान के पीछे का कूटनीतिक संदेश पाकिस्तान के लिए बेहद अपमानजनक था।

जब शहबाज शरीफ को बोलने का अवसर दिया गया, तो उन्होंने ट्रंप की शान में जमकर कसीदे पढ़े। शरीफ ने उन्हें शांति का दूत और दक्षिण एशिया का रक्षक बताते हुए दावा किया कि ट्रंप ने ही भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम में मध्यस्थता की है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने उनके इस दावे को तुरंत सिरे से खारिज कर दिया।

पाकिस्तान में मचा सियासी बवाल, गाजा बल से भी रखा गया बाहर

शहबाज शरीफ की इस फजीहत भरी यात्रा ने पाकिस्तान के भीतर भी एक बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि ‘बोर्ड ऑफ पीसÓ जैसी महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने से पहले न तो संसद को भरोसे में लिया गया और न ही अन्य राजनीतिक दलों से कोई सलाह-मशविरा किया गया।

विपक्ष का यह भी आरोप है कि सरकार ने फिलिस्तीन और इजरायल के मुद्दे पर पाकिस्तान की पुरानी विदेश नीति के साथ समझौता कर लिया है। करीब 40 से अधिक देशों के इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गाजा में मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के लिए एकजुटता दिखाना था।

पाकिस्तान को इस बैठक में बुलाकर औपचारिकता तो पूरी की गई, लेकिन उसे उन देशों की सूची से पूरी तरह बाहर रखा गया जो गाजा में अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल के लिए अपना योगदान देने वाले हैं।