Two-day regional workshop
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रायपुर, 22 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / Raipur: Two-day regional workshop of 8 states on consumer protection / रायपुर उपभोक्ता संरक्षण कार्यशाला , भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग ने छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से 21 और 22 फरवरी को रायपुर में उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ करने विषय पर दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यशाला ने प्रौद्योगिकी अपनाने, संस्थागत क्षमता निर्माण और अंतर-राज्यीय सहयोग के माध्यम से उपभोक्ता न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने की विभाग की प्रतिबद्धता को पुन: स्थापित किया।

कार्यशाला का उद्घाटन छत्तीसगढ़ सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री दयालदास बघेल; National Consumer Disputes Redressal Commission के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. पी. साहि; छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया; भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे; तथा छत्तीसगढ़ सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कांगले की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

दयालदास बघेल ने उपभोक्ता अधिकारों को सशक्त बनाने की बढ़ती प्रतिबद्धता पर बल दिया। उन्होंने ई-फाइलिंग, ई-हियरिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) जैसे सुधारों को त्वरित, सुलभ और किफायती उपभोक्ता न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

साथ ही, डिजिटल ई-कॉमर्स में उभरती चुनौतियों, विशेषकर डार्क पैटर्न और उपभोक्ता आयोगों के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देने की आवश्यकता रेखांकित की।

मुख्य वक्तव्य में निधि खरे ने National Consumer Helpline को प्रभावी प्री-लिटिगेशन मंच बताते हुए कहा कि छोटे दावों वाले मामलों में यह उपभोक्ताओं को राहत दिलाने में विशेष रूप से उपयोगी है।

उन्होंने जानकारी दी कि पिछले वर्ष 31 क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को 52 करोड़ से अधिक की राशि वापिस कराई गई।

सचिव ने निर्धारित समय सीमा में मामलों को निराकृत करने के महत्व पर बल देते हुए उपभोक्ता आयोगों में एंड-टू-एंड डिजिटल केस मैनेजमेंट हेतु ई-जागृति प्लेटफॉर्म के कार्यान्वयन की जानकारी दी।

उन्होंने शिकायत निवारण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग—जैसे डेटा एनालिटिक्स, प्रणालीगत समस्याओं की शीघ्र पहचान और अनुचित व्यापार प्रथाओं (डार्क पैटर्न सहित) के पता लगाने—पर प्रकाश डाला।

अपने मुख्य वक्तव्य में न्यायमूर्ति ए. पी. साहि ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत त्वरित और प्रभावी प्रतितोष की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता न्यायिक विवेक का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक उपकरण के रूप में प्रयुक्त होनी चाहिए।

छह तकनीकी सत्र

1 ई-जागृति, ई-फाइलिंग, ई-हियरिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग

2: शिकायत की स्वीकार्यता की प्रक्रिया

3: डिजिटल एवं ई-कॉमर्स चुनौतियाँ: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न

4: निष्पादन आवेदनों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण

5: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में आवश्यक संशोधनों पर चिंतन

6: उपभोक्ता आयोगों में प्रक्रियात्मक एकरूपता का दायरा

साथ ही, लीगल मेट्रोलॉजी पर समानांतर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें ई-माप, जन विश्वास विधेयक और विनियमन-मुक्ति पर चर्चा हुई।

कार्यशाला में राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों के माननीय सदस्य, विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि, उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारी तथा स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन शामिल हुए।

बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और झारखंड के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान किया।

दो-दिवसीय सम्मेलन में न्यायमूर्ति सुदीप अहलूवालिया, एव्हीएम जे. राजेन्द्र झारखंड राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष बी. के. गोस्वामी, मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुनीता यादव, गोवा राज्य उपभोक्ता आयोग की प्रभारी अध्यक्ष वर्षा बाले तथा ओडिशा राज्य उपभोक्ता आयोग के प्रभारी अध्यक्ष दिलीप मोहापात्रा की उपस्थिति रही।

उपभोक्ता मामले विभाग, भारत सरकार, जून 2022 से देशभर में क्षेत्रीय कार्यशालाओं और राज्य-विशिष्ट परामर्श बैठकों के माध्यम से लंबित मामलों की समीक्षा, सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार और उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।