Shri Hari Vriddha Ashram
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रायपुर 1 मार्च 2026/ ETrendingIndia / When her family abandoned her, elderly Laxmibai found support at Shri Hari Vriddha Ashram./ श्री हरि वृद्ध आश्रम सहारा , दर्द भरी कहानी है विदिशा जिले के ग्राम उमरिया निवासी 70 वर्षीय लक्ष्मीबाई जाटव की जो अब विवश होकर फिलहाल श्रीहरि वृद्ध आश्रम में अपने जीवन के अंतिम दिन गुजार रही हैं।

करीब दो माह पहले कमर की हड्डी टूटने जाने के कारण बाद उनके नाती द्वारा लक्ष्मी बाई को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। उसके बाद से ही परिवारीजनों ने उसकी कोई सुध नहीं ली।

इस दौरान मेडिकल कॉलेज ने मानवता का परिचय देते हुए दो माह तक उनका इलाज और देखभाल की, लेकिन परिजनों का कोई पता नहीं चल सका। पुलिस और प्रशासन के प्रयास भी विफल रहे।

इस स्थिति में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मनीष निगम ने श्री हरि वृद्ध आश्रम विदिशा से संपर्क किया। आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती इंदिरा शर्मा और संचालक वेद प्रकाश शर्मा ने मानवता का धर्म निभाते हुए लक्ष्मीबाई को आश्रम में रखने और जीवनभर सेवा करने का संकल्प लिया है।

24 घंटे की जा रही है सेवा


आश्रम में लक्ष्मीबाई की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें बिस्तर पर ही भोजन, स्नान और अन्य दैनिक सुविधाएं दी जा रही हैं। आश्रम की टीम उनकी 24 घंटे सेवा में जुटी हुई है।

समाज के लिए संदेश

वृद्ध आश्रम की अध्यक्ष श्रीमती इंदिरा शर्मा ने कहा कि आज समाज में बुजुर्गों के प्रति संवेदनाएं कम होती जा रही हैं। यह घटना परिवार और संस्कारों पर गंभीर प्रश्न खड़ा करती है।

केयरगिवर टीम बनेगी

वृद्ध आश्रम के संचालक वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि भविष्य में आश्रम द्वारा केयरगिवर टीम तैयार की जाएगी, जिसमें मेडिकल और नर्सिंग छात्र भी शामिल होंगे।

बदलते परिवेश में बिखरते संस्कार

एक समय था जब बुजुर्गों की सेवा को सौभाग्य माना जाता था, लेकिन आज कई परिवारों में संवेदनाएं समाप्त होती जा रही हैं। जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया, आज वही बुजुर्ग उपेक्षा और तिरस्कार का शिकार हो रहे हैं। कई मामलों में बच्चे अपने माता-पिता को सड़क या आश्रम के बाहर छोड़कर चले जाते हैं, जो समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।

एक निजी अस्पताल का इस तरह से किसी बेबस वृद्ध महिला का सहयोग करना चिकित्सा पेशे के प्रति सम्मान की भावना बढ़ाता है। वहीं बदलते परिवेश में समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि हमें अपने संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों को पुनः जीवित करने की आवश्यकता है।