Agriculture roadmap to be made for every state
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रायपुर 7 अप्रैल 2026/ ETrendingIndia / Agriculture roadmap to be made for every state: emphasis on self-reliance in oilseeds, natural farming and innovation of states, 16 thousand scientists “Lab to Land” The model will deliver technology directly to farmers / कृषि रोडमैप हर राज्य , केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज जयपुर में आयोजित रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस के बाद बताया कि अब पूरे देश को विभिन्न एग्रो–क्लाइमेटिक जोनों में बाँटकर हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप बनाया जाएगा।

सभी किसानों को फार्मर आईडी से जोड़कर खाद, बीज, फसल बीमा और मुआवजा वितरण की पूरी प्रणाली को पारदर्शी और लक्षित किया जाएगा।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन के अंतर्गत 2024–25 में 429.89 लाख टन के रिकॉर्ड उत्पादन और उत्पादकता में हुई बढ़ोतरी को और आगे बढ़ाते हुए तिलहन का क्षेत्र 29 मिलियन हेक्टेयर से 33 मिलियन हेक्टेयर और उत्पादन 39.2 मिलियन टन से 69.7 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है.

इसी तरह। दलहन मिशन के तहत बीज उत्पादन, दाल मिलों की स्थापना, नई बीज किस्मों को सीड चेन में लाने तथा इच्छुक किसानों से 100 प्रतिशत खरीद के माध्यम से देश को दालों में भी मजबूत आत्मनिर्भरता की ओर ले जाया जाएगा।

राज्यवार कृषि रोडमैप और रीजनल कॉन्फ्रेंस

प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह देश की पहली रीजनल कॉन्फ्रेंस है जिसमें ICAR के वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, FPOs, नेफेड, NCCF और बीज से लेकर बाजार तक काम करने वाली सभी संस्थाएं एक मंच पर आई हैं जबकि पहले खरीफ और रबी के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर एक कॉन्फ्रेंस होती थी जिसमें समयाभाव से विस्तार से चर्चा नहीं हो पाती थी।

उन्होंने कहा कि अब देश को पाँच एग्रो–क्लाइमेटिक जोनों में बाँटकर पाँच रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएँगी जिनमें हर राज्य की जलवायु, मिट्टी, पानी और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अलग कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा . उसी के अनुसार यह तय होगा कि किस इलाके में कौन–सी फसल, कौन–सी किस्म और कौन–सी कृषि पद्धति सर्वोत्तम होगी।

फार्मर आईडी: खाद, बीज, बीमा और मुआवजा की रीढ़

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सभी राज्यों में फार्मर आईडी बनाने का काम तेज गति से चल रहा है और विश्वास जताया कि लगभग तीन महीने में सभी किसानों की एकीकृत पहचान तैयार हो जाएगी जिससे किसान को हर योजना का लाभ सीधे और सटीक रूप से मिल सकेगा।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में फार्मर आईडी के आधार पर खाद वितरण का जो मॉडल लागू है, उसी तर्ज पर पूरे देश में व्यवस्था की जाएगी जिसमें किसान को लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, उसकी जमीन और फसल के अनुसार आवश्यक मात्रा में खाद मिलेगा, नकली या ब्लैक मार्केटिंग रोकी जा सकेगी और टेनेंट/बटाईदार किसानों को भी मालिक की स्वीकृति के आधार पर फार्मर आईडी से खाद व अन्य सुविधाएँ मिलेंगी।

यही आईडी आगे फसल बीमा, फसल–क्षति मुआवजा और अन्य लाभों का भी आधार बनेगी।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन: रिकॉर्ड प्रगति और आगे की उड़ान

श्री शिवराज सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन के अंतर्गत 2024–25 में तिलहन का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर 429.89 लाख टन तक पहुँच गया है, जो 2023–24 में 396.69 लाख टन था। उन्होंने कहा कि उत्पादकता 2023–24 के 1314 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024–25 में 1412 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है जो किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और यह संदेश देती है कि सही नीति, बीज, तकनीक और प्रोत्साहन से देश तिलहन में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

2025–26 में 1076 वैल्यू चेन क्लस्टरों के माध्यम से 13.35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को तिलहन के अंतर्गत लाया गया है, 60 बीज केंद्र स्थापित किए गए हैं, 50 बीज भंडारण इकाइयों को मंजूरी दी गई है और 400 तेल मिलें स्थापित हो चुकी हैं जबकि कुल 800 तेल मिलें स्थापित करने का लक्ष्य है ताकि उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और बाजार तक पूरी श्रृंखला मजबूत हो।

तिलहन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य: क्षेत्र, उत्पादकता और उत्पादन

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि तिलहन में आत्मनिर्भरता के लिए 10,103 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है ताकि किसानों को तकनीक, बीज, सिंचाई, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में पूरा सहयोग मिल सके।

उन्होंने बताया कि लक्ष्य यह है कि तिलहन का क्षेत्र 29 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 33 मिलियन हेक्टेयर किया जाए, उत्पादकता 1353 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 2112 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की जाए और कुल उत्पादन 39.2 मिलियन मैट्रिक टन से बढ़ाकर 69.7 मिलियन मैट्रिक टन तक ले जाया जाए ताकि खाद्य तेलों में आयात पर निर्भरता में निर्णायक कमी लाई जा सके और किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों से अधिक आय मिले।

दलहन मिशन: बीज, दाल मिलें, नई किस्में और 100% खरीद

श्री शिवराज सिंह ने बताया कि दलहन मिशन के तहत सभी राज्यों को बीज उत्पादन में अधिकतम वृद्धि करने के लिए कहा गया है ताकि दालों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज किसान के पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि अरहर, उड़द, मसूर आदि दालों में बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रति क्विंटल सहायता दी जाएगी- तुर में 4500 रुपये प्रति क्विंटल, तुर–उड़द में 2000 रुपये प्रति क्विंटल और चना में 1800 रुपये प्रति क्विंटल की मदद दी जा रही है ताकि किसान अच्छे बीज तैयार करने के लिए प्रेरित हों।

दलहन उत्पादन के हॉटस्पॉट, दाल मिलों का नेटवर्क और राज्यों के लिए वित्तीय प्रावधान

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दलहन उत्पादन के मामले में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात मिलकर देश के कुल उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं और इन राज्यों के कई जिले- जैसे मध्य प्रदेश में नर्मदापुरम, राजस्थान में झालावाड़ व टोंक, महाराष्ट्र में गढ़चिरौली और गुजरात में जूनागढ़ बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं, जिन्हें मॉडल जिलों के रूप में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन जिलों में दलहन उत्पादन अपेक्षाकृत कम है, वहाँ की समीक्षा कर उत्पादकता में वृद्धि के लिए विशेष योजना बनाई जाएगी।

दाल मिलों का बड़ा नेटवर्क

कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दलहन प्रोसेसिंग को गति देने के लिए दाल मिलों का बड़ा नेटवर्क विकसित किया जा रहा है; मध्य प्रदेश में 55, महाराष्ट्र में 34, गुजरात में 28, राजस्थान में 30 और गोवा में 5 दाल मिलों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है ताकि उत्पादन के साथ–साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन भी हो सके।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026–27 के लिए मध्य प्रदेश को 344 करोड़ रुपये, राजस्थान को 312 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 166 करोड़ रुपये और गुजरात को 31 करोड़ रुपये दलहन मिशन के तहत उपलब्ध कराए जाएँगे और तुर, उड़द, मसूर जैसी दालों में इच्छुक किसानों की 100 प्रतिशत उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का प्रावधान रखा गया है जिससे किसानों को गेहूँ–चावल की तरह दालों में भी पूर्ण सुरक्षा का भरोसा मिल सके।

विकसित कृषि संकल्प इंटीग्रेटेड–प्राकृतिक खेती और नकली खाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि विकसित कृषि संकल्प अभियान अब राज्यों के कृषि–मौसम और फसल चक्र के अनुसार चलाया जाएगा और लगभग 16,000 वैज्ञानिक, ICAR संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय तथा कृषि विज्ञान केंद्र सीधे किसानों के बीच जाकर “लैब टू लैंड” के सिद्धांत पर काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि छोटी जोतों पर आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल- अनाज के साथ फल, फूल, सब्जियाँ, औषधीय खेती, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन, बकरी पालन और एग्रो फॉरेस्ट्री को बढ़ावा दिया जाएगा और प्राकृतिक खेती की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने, मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के जरिए किसानों को प्रीमियम बाजार दिलाने पर सहमति बनी है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि नकली खाद और नकली कीटनाशकों के खिलाफ पहले भी बड़े अभियान चलाए गए हैं, कई फैक्ट्रियाँ सील की गई हैं, लेकिन अब एक ऐसा ट्रैकिंग सिस्टम बनाया जा रहा है जिससे माल के निकलने से लेकर किसान तक पहुँचने तक पूरी चेन पर नजर रखी जा सके।

उन्होंने कहा कि 1968 के पुराने कानून में केवल मामूली जुर्माने की व्यवस्था है, इसलिए नकली बीज, खाद और पेस्टिसाइड के खिलाफ कड़े कानून लाने पर व्यापक विचार–विमर्श चल रहा है ।

सेटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग से फसल–क्षति का वैज्ञानिक आकलन, आलू–प्याज–टमाटर की लचीली फंडिंग

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने पर सेटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग से फसल–क्षति का वैज्ञानिक आकलन करने पर काम हो रहा है ताकि राज्य सरकारें क्षति का आकलन कर आरबीसी 6(4) के तहत SDRF से राहत दें और साथ–साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से फार्मर आईडी के आधार पर रिकॉर्ड समय में बीमा राशि किसानों तक पहुँचे।

उन्होंने कहा कि रूस–यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकटों का असर खाद और कृषि इनपुट पर पड़ता है, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार इस बात के लिए संकल्पबद्ध है कि भारत विशेषकर किसानों पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े और फिलहाल देश में खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त खाद भंडार मौजूद है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि आलू, प्याज और टमाटर जैसी फसलों में अधिक उत्पादन पर कीमत गिरने और किसानों को डिस्ट्रेस सेल करने की स्थिति से बचाने के लिए राज्य सरकारें अपनी संस्थाओं के माध्यम से किसानों से सीधे खरीद कर बड़े शहरों तक आपूर्ति करेंगी और इस प्रक्रिया में गाँव से शहर तक ट्रांसपोर्ट और भंडारण का खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी ताकि किसान को ठीक दाम और उपभोक्ता को वाजिब कीमत मिल सके।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि हर राज्य को उसकी आवश्यकता के अनुसार योजनाओं में लचीलापन मिले- जिसे ड्रिप सिंचाई की जरूरत है, उसे उसी मद में, जिसे मैकेनाइजेशन या प्रोसेसिंग की आवश्यकता है, उसे उसी मद में अधिक राशि दी जाएगी.