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रायपुर 24 अप्रैल 2026/ ETrendingIndia / Madhya Pradesh will become a major hub of aviation and logistics: Chief Minister Dr Yadav / मध्यप्रदेश एविएशन हब , मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश विमानन क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी के ‘उड़ानÓ विजन को साकार करते हुए प्रदेश को उत्कृष्ट विमानन केंद्र और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

वर्ष 2030 तक यात्री क्षमता 5.5 मिलियन से बढ़ाकर 10 मिलियन प्रति वर्ष तथा माल कार्गो क्षमता 20 हजार मीट्रिक टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।प्रदेश में विमानन अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है।

इंदौर-देवास-उज्जैन क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ एयरपोर्ट सिटी विकसित की जाएगी। यह परियोजना पीपीपी मॉडल पर आधारित होगी, जिससे निवेश, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट पॉलिसी के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे प्रदेश में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित होंगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

मध्यप्रदेश आस्था, अध्यात्म और अनुपम शिल्पकला का संगम है। उज्जैन के श्री महाकाल लोक, ओंकारेश्वर के एकात्म धाम, खजुराहो की ऐतिहासिक धरोहर और ओरछा-चित्रकूट की आस्थाएँ जन-मानस में रची-बसी हैं। इन स्थलों तक सहज पहुँच सुनिश्चित करने के लिए ‘पीएमश्री पर्यटन वायु सेवाÓ और ‘धार्मिक पर्यटन हेली सेवाÓ प्रभावी माध्यम बन रही हैं।

वर्तमान में यह सेवा प्रदेश के 8 प्रमुख केंद्रों—भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, ग्वालियर, सिंगरौली और खजुराहो को आपस में जोड़कर श्रद्धा और पर्यटन को नए पंख लगा रही है। हाल ही में ओरछा और चित्रकूट जैसे पावन धामों के लिए प्रारंभ हुई हेली सेवा ने श्रद्धालुओं के लिए ‘हरि-हर-दर्शनÓ कीको और भी सरल, सुखद और स्मरणीय बना दिया है।

प्रदेश में विमानन क्षेत्र को विकेंद्रीकृत करते हुए हवाई सुविधाओं को तहसील स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। हवाई सेवाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि हर क्षेत्र तक पहुंचें। इसी दृष्टि से प्रत्येक तहसील ब्लॉक में हेलीपैड विकसित करने की योजना है।

प्रदेश में हर 150 किलोमीटर पर एक कॉमर्शियल एयरपोर्ट, 75 किलोमीटर पर एयरस्ट्रिप और 45 किलोमीटर के दायरे में हेलीपैड विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह व्यवस्था आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करेगी और दूरस्थ क्षेत्रों के आर्थिक विकास को नई गति देगी।

विगत दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने हवाई सेवाओं के विस्तार में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। दतिया प्रदेश के 8वें हवाई अड्डे के रूप में अपनी सेवा दे रहा है।

रीवा, सतना और दतिया की सफलता के बाद अब शिवपुरी और उज्जैन में भी नए हवाई अड्डों की तैयारी तेजी से चल रही है। रीवा हवाई अड्डा पूरे विंध्य क्षेत्र के लिए विकास का नया इंजन बन चुका है। यह न केवल सीमेंट और बिजली उत्पादन केंद्रों के लिए मददगार साबित हो रहा है, बल्कि मुकुंदपुर टाइगर सफारी जैसे पर्यटन केंद्रों तक पर्यटकों की पहुँच को भी आसान बना रहा है। इसी कड़ी में हम चित्रकूट और मैहर जैसे आस्था के बड़े केंद्रों को भी बेहतर हवाई नेटवर्क से जोडऩे के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

हवाई यात्रा में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश के हवाई अड्डे सेवा और गुणवत्ता के वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित हो रहे हैं।इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा ‘एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटीÓ सर्वे में 4.90 स्कोर के साथ 16 एशियाई हवाई अड्डों में छठे स्थान पर रहा है।

वहीं भोपाल के राजा भोज अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 24 घंटे संचालन शुरू किया गया है। प्रदेश के सभी हवाई अड्डों पर सुरक्षित, सुगम और बेहतर यात्रा अनुभव सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रदेश की सिविल एविएशन पॉलिसी-2025 विमानन क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में विमानन अधोसंरचना को मजबूत करना, निजी निवेश को आकर्षित करना और युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करना है।नीति के तहत प्रदेश की 11 हवाई पट्टियों को उड़ान प्रशिक्षण (स्नञ्जह्र) और अन्य व्यावसायिक विमानन गतिविधियों के लिए निजी भागीदारी से विकसित किया जा रहा है।

इनमें सिवनी, सागर, गुना, रतलाम, उज्जैन, बालाघाट, उमरिया, छिंदवाड़ा, मंदसौर, नीमच और शिवपुरी शामिल हैं। इससे इन क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विकास होगा।

मध्यप्रदेश में पायलट ट्रेनिंग और एविएशन एजुकेशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रदेश विमानन क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।