रायपुर 7 मई 2026/ ETrendingIndia / Sugarbeet intercropping with sugarcane beneficial for farmers: Farmers’ conference held in Godhi / गन्ना शुगरबीट खेती , छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA), रायपुर द्वारा राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (NSI), कानपुर के सहयोग से गत दिवस बायोफ्यूल कॉम्प्लेक्स ग्राम गोढ़ी जिला दुर्ग में किसान सम्मेलन आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में कवर्धा, बेमेतरा एवं दुर्ग जिले के गन्ना उत्पादक किसान तथा कृषि विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सीमा परोहा,निदेशक, NSI कानपुर, डॉ. लोकेश बाबर, सहायक प्राध्यापक, NSI तथा श्री सुमित सरकार मुख्य कार्यपालन अधिकारी, CBDA की विशेष उपस्थिति रही।
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गन्ना आधारित खेती में सफेद चुकंदर (शुगरबीट) को अंतरफसली के रूप में अपनाकर भूमि उपयोग, दक्षता बढ़ान,] फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना था।
इस दौरान किसानों को शुगरबीट की खेती का प्रत्यक्ष भ्रमण कराया गया एवं फसल की खुदाई भी की गई, जिसमें शुगरबीट का औसत वजन लगभग 3.7 किलोग्राम पाया गया, जो इसकी सफल खेती की संभावनाओं को दर्शाता है।
किसानों ने शुगरबीट के लिए शीघ्र मूल्य निर्धारण एवं प्रभावी विपणन तंत्र विकसित करने की मांग की, साथ ही किसानों द्वारा लाए गए गन्ना फसल के नमूनों पर विशेषज्ञों ने रोग प्रबंधन हेतु आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।
अपने संबोधन में श्री सुमित सरकार ने बताया कि CBDA राज्य में बायोडीजल( बायोएथेनॉल) कंप्रेस्ड बायोगैस एवं ग्रीन हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास हेतु कार्यरत है।
इसी क्रम में नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट के सहयोग से राज्य में पहली बार गन्ना एवं सफेद चुकंदर (शुगर बीट) की अंतरफसली खेती पर अनुसंधान प्रारंभ किया गया है।
उन्होंने कहा कि गन्ना एक दीर्घकालीन फसल होने के कारण इसकी प्रारंभिक अवस्था में भूमि का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता, इसलिए शुगरबीट जैसी अल्पावधि फसल को अंतरफसली रूप में अपनाना किसानों के लिए लाभकारी है।
उन्होंने बताया कि शुगरबीट लगभग 5–6 माह में तैयार हो जाती है और इसे गन्ने के साथ उगाकर अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.
जिससे बायोएथेनॉल उत्पादन हेतु अतिरिक्त कच्चा माल उपलब्ध होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
डॉ. सीमा परोहा ने अपने उद्बोधन में कहा कि गन्ना-शुगरबीट अंतरफसली खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का व्यवहारिक विकल्प है।
उन्होंने बताया कि इस तकनीक का सफल परीक्षण राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र में किया जा चुका है तथा छत्तीसगढ़ में CBDA के सहयोग से इसका प्रथम क्रियान्वयन हुआ है, जिसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने आगामी समय में शुगरबीट के लिए उपयुक्त क्रय मूल्य निर्धारण की दिशा में पहल करने की बात कही।
श्री संतोष कुमार मैत्री, सहायक परियोजना अधिकारी, CBDA ने बताया कि राज्य में पहली बार गन्ना एवं शुगरबीट की अंतरफसली खेती पर ग्राम गोढ़ी में अनुसंधान प्रारंभ किया गया है।
NSI से प्राप्त LS-6 किस्म के माध्यम से किए गए इस अध्ययन के प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं] विशेषकर मुरुम भूमि में इसकी सफलता ने किसानों के लिए नई संभावनाएं खोली हैं।
डॉ. लोकेश बाबर ने किसानों को शुगरबीट की खेती अपनाने हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि यह कम लागत में अधिक लाभ देने वाली तकनीक है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि NSI द्वारा किसानों को बीज उपलब्ध कराए जाएंगे तथा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सीमा परोहा ने CBDA परिसर स्थित हर्बेरियम एवं आर्बोरेटम का भ्रमण किया तथा ऊर्जा फसल नेपियर घास के क्षेत्र का अवलोकन किया] जिससे कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन की संभावनाएं हैं।
