सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल : हजरत दूल्हा बादशाह बाबा के 58वें उर्स में उमड़ा जनसैलाब

dulha badshah urs

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रायपुर 8 मई 2026/ ETrendingIndia / दूल्हा बादशाह उर्स , मध्य प्रदेश के सीहोर शहर की गंगा-जमुनी तहजीब और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हजरत दूल्हा बादशाह बाबा का 58वां उर्स मुबारक अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया।

“सर्व धर्म दरगाह व उर्स कमेटी” द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय आयोजन में न केवल धार्मिक रस्में अदा की गईं, बल्कि कला और संस्कृति के माध्यम से भाईचारे का संदेश भी दिया गया।

तीन दिवसीय सांस्कृतिक और रूहानी आयोजन

5 मई: कार्यक्रम का आगाज मिलाद शरीफ के साथ हुआ। इसी शाम मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें रचनाकारों ने अपनी कलम से अमन और प्रेम का पैगाम दिया।

6 मई: कव्वाली की शानदार महफिल सजी, जिसमें मशहूर कव्वाल फैज अली फैज साबरी और सादिक ताज ने अपने रूहानी कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

7 मई: उर्स के समापन पर हिंदुस्तान के मशहूर फनकार हलीम ताज (जबलपुर) और कासिम साबरी ने अपने विशेष अंदाज में कव्वालियां पेश कीं, जो देर रात तक जारी रहीं।

अतिथियों ने सराहा भाईचारा

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी अखिलेश राय और नपाध्यक्ष प्रिंस राठौर सम्मिलित हुए।

अतिथियों का स्वागत करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी अखिलेश राय ने कहा कि, “सीहोर सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों की गहरी आस्था हजरत दूल्हा बादशाह बाबा से जुड़ी है। यह दरगाह बरसों से लोगों की मुरादें पूरी करने और समाज को जोड़ने का केंद्र रही है।”
वहीं, नपाध्यक्ष विकास प्रिंस राठौर ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि,”यह उर्स सही मायनों में हिंदू-मुस्लिम एकता और भारतीय नागरिकों की अटूट आस्था को दर्शाता है। ऐसे आयोजन समाज में आपसी विश्वास को और मजबूत करते हैं।”

इन्होंने संभाली व्यवस्थाएं

इस सफल आयोजन में उर्स कमेटी के अध्यक्ष नौशाद खान और दरगाह कमेटी अध्यक्ष रिजवान पठान के नेतृत्व में पूरी टीम मुस्तैद रही। आयोजन में मुख्य रूप से सेवा यादव, यामीन बिजली, भवर दादा, अफजल पठान, आसिफ अंसारी, तय्यू भाई, आरिफ लाला, शावेज बाबा, वरिष्ठ पत्रकार किशन बाबा, रईस बाबा, अनवर बाबा ख़ादिम, अंसार बाबा, मेहमूद नेता, अन्नी बाबा, हनीफ भाई, बिलाल भाई, ओवैस राईन, फरदीन और आबिद सहित बड़ी संख्या में सदस्य व सेवादार शामिल हुए।

“हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक”को चरितार्थ करते हुए इस उर्स में हर धर्म और वर्ग के लोगों ने शिरकत की और बाबा की दरगाह पर माथा टेककर दुआएं मांगीं।