Share This Article

रायपुर 13 मई 2026/ ETrendingIndia / Maritime Amrit Kaal Vision @ 2047: Historic Agreement for India’s first mega greenfield shipyard at Thoothukudi / भारत का पहला मेगा ग्रीनफील्ड शिपयार्ड थूथुकुडी , भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में, 20 अप्रैल 2026 को भारत सरकार के अधीन एक प्रमुख बंदरगाह वीओ चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी (वीओसीपीए) और तमिलनाडु सरकार के उपक्रम स्टेट इंडस्ट्रीज प्रमोशन कॉर्पोरेशन ऑफ तमिलनाडु (एसआईपीसीओटी) द्वारा संयुक्त रूप से प्रवर्तित एक विशेष प्रयोजन वाहन नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क, तमिलनाडु लिमिटेड (एनएसएचआईपी-टीएन) और के बीच तमिलनाडु के थूथुकुडी में भारत के पहले मेगा ग्रीनफील्ड शिपयार्ड के विकास के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

दक्षिण कोरिया गणराज्य (आरओके) के राष्ट्रपति श्री ली जे म्युंग की भारत में राजकीय यात्रा के दौरान, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौते का उद्देश्य जहाज निर्माण, जहाजरानी और समुद्री लॉजिस्टिक में साझेदारी करना है।

इस रूपरेखा का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान हुई बैठक के बाद किया गया था।

थूथुकुडी ग्रीनफील्ड शिपयार्ड भारत-दक्षिण कोरिया समुद्री सहयोग ढांचे के तहत सबसे पहले कार्यान्वित किए गए परिणामों में से एक है और समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।

समझौता ज्ञापन थूथुकुडी में विश्व स्तरीय मेगा शिपयार्ड के संयुक्त विकास, वित्तपोषण, निर्माण और संचालन के लिए आधार प्रदान करता है, जिसकी अनुमानित वार्षिक क्षमता 25 लाख ग्रॉस टन (जीटी) है।

परियोजना के सुचारू रूप से चलने पर लगभग 15,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, साथ ही तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

प्रस्तावित शिपयार्ड, एनशिप-टीएन द्वारा विकसित किए जा रहे थूथुकुडी शिपबिल्डिंग क्लस्टर की मुख्य सुविधा के रूप में कार्य करेगा।

परियोजना के लिए तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता रिपोर्ट पहले ही पूरी हो चुकी है, जबकि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का कार्य वर्तमान में जारी है।

एनशिप-टीएन को भारत सरकार के राष्ट्रीय जहाज निर्माण मिशन से थूथुकुडी में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति भी मिल चुकी है।

भारत के समुद्री अमृतकाल विजन 2047 का लक्ष्य भारत को विश्व स्तर पर शीर्ष पांच जहाज निर्माण करने वाले देशों में स्थान दिलाना है, जिसके तहत वर्ष 2047 तक प्रति वर्ष 4.5 मिलियन जीटी जहाज निर्माण उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

प्रस्तावित थूथुकुडी संयंत्र, जिसकी अनुमानित वार्षिक क्षमता 2.5 मिलियन जीटी है, से भारत के वाणिज्यिक जहाज निर्माण परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन आने और देश की वर्तमान जहाज निर्माण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

जहाज निर्माण क्षमता सृजन के अलावा, इस परियोजना का उद्देश्य सहायक और घटक विनिर्माण समूहों, समुद्री उपकरणों और इंजीनियरिंग आपूर्ति श्रृंखलाओं के स्थानीयकरण, कार्यबल कौशल संवर्धन पहलों और उन्नत विनिर्माण, डिजिटल जहाज निर्माण और हरित शिपिंग प्रौद्योगिकियों को अपनाने के माध्यम से एक व्यापक समुद्री औद्योगिक इकोसिस्‍टम के विकास को गति प्रदान करना है।

इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जहाज निर्माण केंद्र के रूप में तेजी से विकसित करना है।

इस नीति पैकेज के लागू होने के बाद से, भारतीय जहाज निर्माण स्थलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि और ऑर्डरों का प्रवाह देखा गया है.

सीएमए सीजीएम ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में छह 1,700 टीईयू जहाजों के लिए ऑर्डर दिए हैं, जबकि स्वान एनर्जी के पिपावाव शिपयार्ड ने नॉर्वे से छह रासायनिक टैंकरों और ब्रिटेन से चार अमोनिया-संचालित कामसारमैक्स बल्क कैरियर के लिए अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर हासिल किए हैं।

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री श्री सरबानंदा सोनोवाल ने इस अवसर पर कहा, “इस ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में वैश्विक समुद्री शक्ति बनने की दिशा में हमारी यात्रा का एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

यह न केवल भारत की वाणिज्यिक जहाज निर्माण क्षमता में परिवर्तन लाएगी, बल्कि हजारों कुशल रोजगार सृजित करेगी, औद्योगिक विकास को गति देगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ हमारे समुद्री इकोसिस्‍टम को मजबूत करेगी.