रायपुर 19 जून 2026/ ETrendingIndia / “Baby girl with rare congenital skin disease – thick, porcupine spine-like layers on body – multi-disciplinary expert treatment underway at AIIMS Raipur” अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में चिकित्सा विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक टीम ने इक्थियोसिस हाइस्ट्रिक्स (Ichthyosis Hystrix) से पीड़ित एक बच्ची का व्यापक उपचार शुरू किया है, जो कि एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात त्वचा रोग है। इस बीमारी की पहचान शरीर पर मोटी, अत्यधिक केराटिनयुक्त (hyperkeratotic) और साही (porcupine) के कांटों जैसी परतें बनने से होती है।
इस रोग की जटिलताओं को दूर करने के लिए, एम्स रायपुर ने समग्र चिकित्सा, पोषण और सामाजिक-मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञों, शिशु रोग विशेषज्ञों, आनुवंशिकी विशेषज्ञों, पोषण विशेषज्ञों और मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर्स (MSSOs) की एक समर्पित संयुक्त टीम तैनात की है।
विशिष्ट स्वास्थ्य देखभाल के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक जिंदल ने कहा, “दुर्लभ बीमारियों का प्रबंधन केवल दवाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके लिए वास्तव में एक बहु-विषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
एम्स रायपुर में त्वचा रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, आनुवंशिकी विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ, मेडिकल सोशल सर्विस ऑफिसर और अन्य विशेषज्ञ मिलकर व्यापक और संवेदनशील देखभाल प्रदान कर रहे हैं।
हमारा ध्यान न केवल बीमारी के इलाज पर है, बल्कि बच्चे और परिवार की पोषण संबंधी, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करने पर भी है।
देखभाल का यह एकीकृत मॉडल सुलभ, उन्नत और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
इस विशिष्ट उपचार का नेतृत्व एम्स रायपुर के त्वचा रोग विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. नम्रता छाबड़ा कर रही हैं। डॉ. छाबड़ा के अनुसार, इक्थियोसिस हाइस्ट्रिक्स जन्मजात इक्थियोसिस का एक दुर्लभ प्रकार है जो या तो वंशानुगत हो सकता है या जीन म्यूटेशन के कारण स्वतः उत्पन्न हो सकता है।
इस विशिष्ट मामले में, परिवार में इस बीमारी का कोई पुराना इतिहास नहीं है, जो इसके स्वतः उत्पन्न होने का संकेत देता है।
मेडिकल टीम ने पहले ही स्थानीय (टॉपिकल) उपचार शुरू कर दिया है और सटीक आणविक (molecular) निदान की पुष्टि के लिए उन्नत आनुवंशिक जांच के साथ-साथ त्वचा की बायोप्सी भी निर्धारित की है। इसके अतिरिक्त, आंखों, सुनने की क्षमता और हड्डियों से संबंधित संभावित जटिलताओं की भी जांच की जा रही है, जो कभी-कभी इस बीमारी से जुड़ी हो सकती हैं।
हालांकि जन्मजात इक्थियोसिस दीर्घकालिक प्रबंधन की चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है, लेकिन नैदानिक आंकड़े बताते हैं कि कई मरीजों में उम्र बढ़ने के साथ त्वचा के लक्षणों में क्रमिक सुधार होता है। हालांकि, संक्रमण, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), तापमान नियंत्रण में कठिनाई और गंभीर पोषण संबंधी कमियों के उच्च जोखिम के कारण शिशु अवस्था के दौरान इसकी निरंतर निगरानी आवश्यक है।
वर्तमान में, बच्ची की स्थिति स्थिर है, और कुपोषण को प्राथमिक चिकित्सीय चिंता के रूप में पहचाना गया है। पोषण विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम शिशु रोग विभाग की निरंतर देखरेख में बच्ची के आहार पुनर्वास का प्रबंधन कर रही है।
यह अनूठा मामला जटिल नवजात शिशु देखभाल, उन्नत निदान और दीर्घकालिक चिकित्सीय प्रबंधन के क्षेत्र में एम्स रायपुर की बढ़ती विशेषज्ञता को रेखांकित करता है, जिससे छत्तीसगढ़ और उसके पड़ोसी राज्यों के मरीजों को महत्वपूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल (tertiary healthcare) समाधान उपलब्ध हो रहे हैं।
