Share This Article मैंने एक चींटी का रास्ता काटा,और उसने अपना रास्ता बदल लिया।बिल्ली ने मेरा रास्ता काटा,मैंने अपनी आस्था बदल ली। मुझसे बेहतरभविष्य की समझ चींटी में है,उसे निरंतर चलना आता है,मैं अक्सर ठहर जाता हूँऔर डर जाता हूँ। मैं भविष्य कोकल्पनाओं के आईने में देखता हूँ,वह वर्तमान की मिट्टी परअपने पाँव रखकर चलती है। मैं संकेतों में उलझा रहता हूँ,वह श्रम में विश्वास रखती है। भविष्य तो उस चींटी के पास हैजो रास्ता बदल लेती है,मंज़िल नहीं।और शायद इसीलिएवह मुझसे छोटी होकर भीमुझसे आगे है। चींटी और भविष्यरायपुर , 25 जून 2026/ ETrendingIndia / मनोज मौर्य, मुंबई रचयिता.. लगभग 20 वर्षों से माया नगरी मुंबई में फ़िल्म निर्माता, निर्देशक, कथाकार, गीतकार, लेखक के रूप में स्थापित मनोज मौर्य किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आपने कई फिल्मों का निर्देशन किया है। अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित मनोज जी को फाइन आर्ट, पेंटिंग्स, पर्यटन आदि इत्यादि के शौक और घुमक्कड़ मिज़ाज ने इन्हें अनुभवों की खान बना दिया है। उनकी कविताएं अपने आप संवेदनशील हृदय के द्वार से जैसे हवा की मानिंद बहने लगती हैं। आज के माहौल की मनःस्थिति को बयां करती ये कविता उसी की एक बानगी है…. Share This Article Post navigation प्रकाश राज पर गिरफ्तारी वारंट की खबरों पर बवाल: अभिनेता बोले- ‘फेक न्यूज फैलाने वालों को जवाब मिल गया’ ॥ क्या तुम वही हो? ॥