Share This Article रायपुर, 29 जून 2026/ ETrendingIndia / “National Workshop on Tiger Reintroduction: Sariska emerges as a global conservation model.”केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को राजस्थान के अलवर में “बाघों का पुनर्वास : अवसर और चुनौतियां” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने भारत में बाघों के सक्रिय प्रबंधन पर रोडमैप, भारत में बाघों के पुनर्वास एवं संरक्षण पर पुस्तिका तथा प्रोजेक्ट चीता की वार्षिक रिपोर्ट (सितंबर 2024-दिसंबर 2025) का विमोचन भी किया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा राजस्थान सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में देश के विभिन्न बाघ अभ्यारण्यों के क्षेत्रीय निदेशक, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक तथा वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य बाघों के पुनर्वास और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना रहा। सरिस्का बना दुनिया के लिए मिसाल सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्वास के 18 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि बाघ संरक्षण केवल एक वन्यजीव की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वनों, जलक्षेत्रों और समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण का भी माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरिस्का में वर्ष 2005 में बाघ स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो गए थे, लेकिन वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रभावी संरक्षण उपायों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के कारण आज यहां 56 बाघ सुरक्षित हैं। उन्होंने इसे विश्व का पहला सफल वैज्ञानिक बाघ पुनर्वास कार्यक्रम बताते हुए कहा कि यह वैश्विक स्तर पर संरक्षण का अनुकरणीय मॉडल बन चुका है। देश में बढ़े बाघ अभ्यारण्य और बाघों की संख्या केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में देश में बाघ अभ्यारण्यों की संख्या 46 से बढ़कर 58 हो गई है। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2022 तक बाघों की संख्या दोगुनी करने के सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया है। उन्होंने कहा कि पन्ना और सरिस्का में बाघों के सफल पुनर्वास के पीछे स्थानीय समुदायों का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण रहा, जबकि ओडिशा के सतकोसिया में सामुदायिक सहयोग के अभाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। प्रोजेक्ट चीता में भी अहम भूमिका निभा रहे ग्रामीण भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट चीता की सफलता में भी स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के हितों और आजीविका का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है। उन्होंने उन क्षेत्रों में, जहां बाघ और हाथियों का आवास एक-दूसरे से जुड़ता है, प्राकृतिक गलियारों (कॉरिडोर) को सुरक्षित एवं मजबूत बनाए रखने पर विशेष बल दिया। वैज्ञानिक प्रबंधन पर रहेगा फोकस मंत्री ने कहा कि कार्यशाला में बाघों के संभावित स्रोत क्षेत्रों और कम होती आबादी वाले क्षेत्रों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही सफल पुनर्वास कार्यक्रमों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल बाघों की रक्षा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि कोई भी वन्य प्रजाति विलुप्त न हो। संरक्षण के सभी प्रयास वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों पर आधारित होने चाहिए। विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभवकार्यशाला में इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) के महानिदेशक एस.पी. यादव ने कहा कि सरिस्का में बाघों का सफल पुनर्वास विश्वभर के लिए प्रेरणा है और इससे यह सिद्ध हुआ है कि वैज्ञानिक प्रयासों से उपयुक्त क्षेत्रों में बाघों की आबादी पुनर्स्थापित की जा सकती है। वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी ने कहा कि सरिस्का अब अन्य उपयुक्त क्षेत्रों के लिए बाघों का स्रोत बनने की क्षमता रखता है। एनटीसीए के सदस्य सचिव संजय कुमार ने सरिस्का के पुनर्वास कार्यक्रम को प्रोजेक्ट टाइगर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। तकनीकी सत्रों में बनी भविष्य की रणनीति कार्यशाला में पर्यावास बहाली, शिकार आधार को मजबूत करने, वन्यजीव स्थानांतरण, लैंडस्केप कनेक्टिविटी, निगरानी प्रणाली तथा सक्रिय प्रबंधन रणनीतियों पर विस्तृत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। सरिस्का, पन्ना सहित विभिन्न बाघ अभ्यारण्यों के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि बाघों की कम संख्या वाले अभ्यारण्यों ने भविष्य की पुनर्वास योजनाएं प्रस्तुत कीं। इसके अलावा प्रोजेक्ट चीता और गौर एवं बारहसिंगा जैसी शाकाहारी प्रजातियों के स्थानांतरण के माध्यम से शिकार आधार बढ़ाने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यशाला से प्राप्त सुझाव भविष्य में बाघों की कम आबादी वाले क्षेत्रों में विज्ञान आधारित पुनर्वास, पर्यावास बहाली, शिकार आधार सुदृढ़ीकरण तथा सक्रिय संरक्षण प्रबंधन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। Share This Article Post navigation ‘ग्लोबल साउथ’ जलवायु परिवर्तन का खामियाजा भुगत रहा है : प्रधानमंत्री मोदी फेसबुक और इंस्टाग्राम बना प्रेम का जरिया : अलीशा बनी अदिति, किया प्रेम विवाह