रायपुर, 09 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “Donald Trump launches investigation into H-1B Visa fraud… indirect impact possible on Indian professionals” अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एच-1बी कार्य वीजा तथा स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) से जुड़ी श्रम प्रमाणन (परम) प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी की व्यापक जांच शुरू कर दी है।
अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथोनी डीएस्पोसिटो ने बुधवार को बताया कि यह जांच आव्रजन व्यवस्था में धोखाधड़ी, फर्जी कंपनियों, फर्जी नियुक्तियों, मानव तस्करी और अमेरिकी श्रमिकों के विस्थापन जैसे मामलों पर केंद्रित होगी।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच के दौरान कई दर्जन समन जारी किए जा चुके हैं। विभाग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं वीजा प्रणाली का दुरुपयोग कर विदेशी कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति तो नहीं की जा रही है।
जांच में ऐसे मामलों को भी शामिल किया गया है, जिनमें मानव तस्करी या संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध से संबंध होने की आशंका है।
डीएस्पोसिटो के अनुसार कुछ मामलों में स्वास्थ्य सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत विदेशी कर्मचारियों की नियुक्तियों की भी जांच की जाएगी।
उनका कहना है कि यदि वीजा प्रक्रिया का दुरुपयोग होता है तो इससे अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा और रोजगार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा के लिए आवेदन करने वाले नियोक्ताओं पर एक लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 95 लाख रुपये) का अनिवार्य शुल्क लगाने का निर्णय लिया था।
प्रशासन का तर्क था कि इससे विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता कम होगी। हालांकि, पिछले महीने एक संघीय न्यायालय ने इस निर्णय को निरस्त करते हुए कहा कि प्रशासन ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह कदम उठाया था।
भारतीयों पर कितना पड़ेगा असर ?
अमेरिका में जारी होने वाले एच-1बी कार्य वीजा में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी लगभग 70 से 73 प्रतिशत मानी जाती है।
इनमें अधिकांश सूचना प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर अभियांत्रिकी तथा अन्य उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इस जांच का सीधा असर सभी भारतीय कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा। जांच मुख्य रूप से फर्जी कंपनियों, कागजी नियुक्तियों, कम वेतन, वीजा धोखाधड़ी और मानव तस्करी जैसे मामलों तक सीमित रहेगी।
हालांकि, चूंकि एच-1बी वीजा धारकों में भारतीयों की संख्या अधिक है, इसलिए जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ भारतीय पेशेवरों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों की भी अतिरिक्त जांच हो सकती है।
क्या है एच-1बी वीजा ?
एच-1बी एक गैर-आप्रवासी कार्य वीजा है, जिसके माध्यम से अमेरिकी कंपनियां विदेशी कुशल पेशेवरों को नियुक्त करती हैं।
इसका उपयोग मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाएं, चिकित्सा अनुसंधान तथा उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।
क्या है परम (श्रम प्रमाणन) प्रक्रिया ?
परम (प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक समीक्षा प्रबंधन) अमेरिका की रोजगार आधारित स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) प्रक्रिया का पहला और महत्वपूर्ण चरण है। इसका संचालन अमेरिकी श्रम विभाग करता है।
इस प्रक्रिया के तहत नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति श्रम नियमों के अनुरूप की जा रही है। इसके लिए कड़े नियम और विस्तृत दस्तावेजी प्रक्रिया निर्धारित है।
