रायपुर,16 जुलाई / ETrendingIndia / “Supreme Court refuses to hear bulldozer action case, asks petitioners to approach the High Court.” सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिनमें आरोप लगाया गया था कि बुलडोजऱ एक्शन के खिलाफ सर्वोच्च अदालत की तरफ से तय किए गए गाइडलाइन्स का उल्लंघन करते हुए तोड़-फोड़ की कार्रवाई की गई।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी शिकायतों को संबंधित हाई कोर्ट के सामने उठाया जाना चाहिए।
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी अवमानना याचिकाओ पर दलील सुनने के बाद यह कहा कि इन याचिकाओं में अलग-अलग तथ्यात्मक विवाद है। अलग-अलग तथ्यों को लेकर दाखिल किए गए इन मामलों के प्रत्येक दावे पर सुप्रीम कोर्ट निर्णय नहीं दे सकता है।
इसके बाद कोर्ट ने सभी और मानना याचिकाओं को संबंधित हाई कोर्ट में विचार करने के लिए भेजने का आदेश दिया।
राज्य सरकारों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करने का आरोप
बुलडोजऱ कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना के आरोप वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील अनस तनवीर ने कहा, सुप्रीम कोर्ट की ओर से बुलडोजऱ से जुड़ी गाइडलाइंस जारी किए जाने के बाद भी कुछ राज्यों ने उनका पालन नहीं किया।
कुछ मामलों में हाई कोर्ट ने पाया कि उन्हें इस फैसले के बारे में जानकारी ही नहीं दी गई थी। ऐसा ही एक खास मामला भी सामने आया। स्मारकों, पूजा-स्थलों और निजी संपत्तियों के खिलाफ बुलडोजऱ से कार्रवाई की गई, जो हमारे आरोप के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पूरी तरह से उल्लंघन था।
दरअसल बुलडोजर जस्टिस को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2024 में दिए गए फैसले का उल्लंघन करते हुए अलग-अलग राज्यों में बुलडोजर चलाए जाने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई अवमानना याचिकाए दाखिल की गई थी।
इससे पहले कोर्ट ने पहले कुछ अवमानना याचिकाओं में अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। सोमनाथ में कुछ मस्जिदों को अवैध रूप से गिराने के आरोप वाली एक अवमानना याचिका में पेश हुए सीनियर एडवोकेट हुज़ेफ़ा अहमदी ने कहा कि कोर्ट को गंभीर उल्लंघनों के मामलों में दखल देना चाहिए। अहमदी ने कहा कि अगर मौका मिले तो वे पंद्रह मिनट के भीतर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के गंभीर उल्लंघन को साबित कर सकते हैं।
वहीं, महाराष्ट्र से जुड़े एक अवमानना मामले में पेश हुए सीनियर एडवोकेट चंद्र उदय सिंह ने कहा कि कई बार तोड़-फोड़ की कार्रवाई स्थानीय नेताओं द्वारा बुलडोजऱ एक्शन लेने की सार्वजनिक घोषणाओं के बाद की जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा दायर हलफनामे से ही पता चल जाएगा कि उस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब ऐसी तोड़-फोड़ को साफ तौर पर सज़ा देने वाली कार्रवाई के तौर पर देखा जाता है।
बता दें कि आरोप लगते रहे हैं कि विभिन्न राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाइडलाइन्स का पालन नहीं किया। अभी हाल में ही झारखंड के धनबाद में कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के घर पर बुलडोजर एक्शन की कार्रवाई की गई।
