रायपुर, 27 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / मानसून शुरू होते ही छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव जिला जल संरक्षण की अनूठी पहल ‘मिशन जल रक्षा’ के साथ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।
विज्ञान आधारित तकनीक, जनभागीदारी और प्रभावी योजना के माध्यम से जिले ने बारिश की हर बूंद को सहेजने और भूजल स्तर बढ़ाने का मॉडल तैयार किया है। यह अभियान अब #CatchTheRain के तहत देश के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।
मानसून से पहले पूरी तैयारी
राजनांदगांव ने बारिश शुरू होने से पहले ही जल संरक्षण की व्यापक तैयारी कर ली। लक्ष्य है कि बारिश का पानी बहकर व्यर्थ न जाए, बल्कि उसे संरक्षित कर भूजल भंडार तक पहुंचाया जाए।
विज्ञान और तकनीक का प्रभावी उपयोग
मिशन के तहत जीआईएस मैपिंग, रिमोट सेंसिंग, एक्विफर मैपिंग, डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) और रिज-टू-वैली प्लानिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर भूजल रिचार्ज के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान की गई।
जनभागीदारी बनी सबसे बड़ी ताकत
किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्राम पंचायतों ने जल बजट, जागरूकता अभियान और जल संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इससे यह पहल एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।
खेती में बदलाव से भी पानी की बचत
गर्मी के मौसम में लगभग 70% क्षेत्र में धान की जगह कम पानी वाली फसलों को अपनाया गया। इससे भूजल पर दबाव कम हुआ और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिला।

अभियान से जुड़े आंकड़े
662 गांवों में 60 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं रिचार्ज संरचनाएं तैयार।
500 से अधिक अनुपयोगी बोरवेल को रिचार्ज शाफ्ट में बदला गया।
1700 से अधिक परकोलेशन टैंक और 600 से अधिक इंजेक्शन वेल बनाए गए।
2500 से अधिक जल स्रोतों की जियो-टैगिंग की गई।
51 लाख से अधिक मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ।
जिले में भूजल स्तर औसतन 2.04 मीटर तक बढ़ा।
देश के लिए प्रेरक मॉडल
राजनांदगांव का ‘मिशन जल रक्षा’ यह साबित करता है कि वैज्ञानिक योजना, सामुदायिक भागीदारी और समय पर तैयारी से मानसून को जल सुरक्षा के स्थायी अवसर में बदला जा सकता है। यह मॉडल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच देशभर के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है।
