छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही ‘पशु सखियों’ ने शैक्षणिक भ्रमण के दौरान आधुनिक पशुपालन, दुग्ध प्रबंधन, नस्ल सुधार और पशु स्वास्थ्य की वैज्ञानिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया।
यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और दुग्ध उत्पादन को नई दिशा दे रही है।
शैक्षणिक भ्रमण से बढ़ा आत्मविश्वास
बैंक ऑफ बड़ौदा आरसेटी के प्रशिक्षण के तहत पशु सखियों ने आधुनिक पशुपालन की नई तकनीकों को करीब से समझा। इससे वे अपने गांवों में बेहतर सेवाएं देने के लिए तैयार हुई हैं।
दुग्ध गुणवत्ता और विपणन की मिली जानकारी
मुजगहन दुग्ध शीत केन्द्र में दूध संग्रहण, फैट व एसएनएफ जांच, मिल्क चिलिंग और गुणवत्ता के आधार पर बेहतर मूल्य मिलने की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया।
नस्ल सुधार से बढ़ेगीड उत्पादकता
गौठानों में कृत्रिम गर्भाधान, उन्नत नस्ल चयन और दुग्ध क्षमता बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई, जिससे पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
चारा प्रबंधन और पशु स्वास्थ्य पर फोकस
नेपियर चारा, यूरिया उपचारित पैरा, संतुलित आहार, खुरपका-मुंहपका (FMD) की रोकथाम, नियमित टीकाकरण और वैज्ञानिक पशुपालन के महत्व से महिलाओं को अवगत कराया गया।
गांवों में बनेंगी तकनीकी सहयोगी
प्रशिक्षण प्राप्त पशु सखियों ने कहा कि अब वे अपने गांवों में पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन, दुग्ध गुणवत्ता और पशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी।
