रायपुर, 08 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का सबसे बड़ा असर दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है।
इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है और बड़ी संख्या में जहाजों की आवाजाही अटकी हुई है।
अब इसे फिर से खोलने के लिए ईरान और ओमान के बीच बातचीत चल रही है। हालांकि, इस बातचीत में ईरान की कुछ प्रमुख मांगों के कारण अब तक अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन और जहाजों की आवाजाही पर अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।
दूसरी ओर ओमान क्षेत्रीय स्तर पर जलमार्ग के प्रबंधन और सुरक्षित नौवहन की व्यवस्था का प्रस्ताव रख रहा है।
अमेरिका किसी भी ऐसी व्यवस्था का विरोध कर रहा है, जिसमें जहाजों से अनिवार्य शुल्क वसूला जाए या किसी देश के जहाजों की आवाजाही पर राजनीतिक आधार पर रोक लगे।
पहली मांग होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की
बातचीत में ईरान की पहली प्रमुख मांग होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ईरान माल से लदे जहाजों से उनके माल के मूल्य का करीब 5 से 7 प्रतिशत तक शुल्क लेने की मांग कर रहा है।
वहीं, ओमान इससे कम शुल्क की व्यवस्था पर विचार कर रहा है, जबकि अमेरिका जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर किसी अनिवार्य शुल्क के पक्ष में नहीं है।
जहाजों की आवाजाही की भूमिका और नियंत्रण की मजबूती
ईरान की दूसरी मांग होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर अपनी भूमिका और नियंत्रण को मजबूत करने से जुड़ी है। तेहरान चाहता है कि जलमार्ग से संबंधित नौवहन व्यवस्था में उसकी निर्णायक भूमिका हो।
यही मुद्दा बातचीत में सबसे बड़ा अड़ंगा माना जा रहा है। ओमान का प्रस्ताव क्षेत्रीय प्रबंधन और सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय नौवहन पर अधिक जोर देता है।
अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध
तीसरी मांग अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध से संबंधित बताई जा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अमेरिकी और इजरायली जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं देना चाहता।
इसके अलावा, ईरान विरोधी देशों के जहाजों के लिए मुआवजे या अन्य शर्तों की मांग की भी खबरें सामने आई हैं।
हालांकि, इन प्रस्तावों के सभी विवरण अभी किसी अंतिम सार्वजनिक समझौते का हिस्सा नहीं हैं।
बातचीत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ईरान शुल्क वसूलने की अपनी मांग में कुछ नरमी दिखा सकता है। लेकिन जलडमरूमध्य के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था में अपनी मजबूत भूमिका बनाए रखने की उसकी मांग अधिक महत्वपूर्ण बनी हुई है।
ओमान की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में जलमार्ग के प्रबंधन को क्षेत्रीय स्तर पर संचालित करने और जहाजों से केवल स्वैच्छिक या सेवा आधारित शुल्क लेने की बात सामने आई है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य होर्मुज से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करना है।
अमेरिका की मुख्य आपत्ति
होर्मुज की आवाजाही को किसी एक देश के नियंत्रण में देने और जहाजों से अनिवार्य शुल्क वसूलने को लेकर है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि वाणिज्यिक जहाजों को बिना राजनीतिक भेदभाव के सुरक्षित मार्ग मिले।
ताजा बातचीत में प्रगति के संकेत भी मिले हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है और यदि समझौता लागू होता है तो वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी ओर से उठाए जाने वाले कदम ईरान द्वारा अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने पर निर्भर होंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर और आगे हिंद महासागर से जोडऩे वाला अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा इस मार्ग से होकर गुजरता है।
ऐसे में यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने से तेल, गैस और समुद्री परिवहन की लागत पर व्यापक असर पड़ सकता है।
होर्मुज की मौजूदा स्थिति का असर खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति और निर्यात पर भी पड़ रहा है।
अबू धाबी राष्ट्रीय तेल कंपनी ने भी बताया है कि संघर्ष के दौरान उसके कई जहाजों को निशाना बनाए जाने से उसके परिचालन पर गंभीर असर पड़ा है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
अब बातचीत का मुख्य सवाल यही है कि होर्मुज को किस व्यवस्था के तहत खोला जाए। ईरान अपने प्रभाव और नियंत्रण को बनाए रखना चाहता है, जबकि ओमान क्षेत्रीय प्रबंधन और सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय नौवहन की व्यवस्था चाहता है।
अमेरिका किसी भी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है, जिसमें उसके जहाजों पर प्रतिबंध या अनिवार्य शुल्क लगाया जाए।
