Justice Yashwant VermaJustice Yashwant Verma
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रायपुर, 13 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित एक संसदीय समिति ने पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से नकदी मिलने के मामले में उन्हें जिम्मेदार ठहराया है। समिति ने निष्कर्ष निकाला कि पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट के जज आवास में मिले पैसों की मौजूदगी का संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहे।

बुधवार को संसद में पेश की गई समिति की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास के एक स्टोररूम में 500 रुपए के नोटों की बड़ी मात्रा बरामद हुई थी, जिनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा सकी। यह मामला तब सामने आया था, जब 14 मार्च 2025 की रात उनके आवास पर आग लगी थी। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को स्टोररूम में बड़ी मात्रा में आंशिक रूप से जले हुए नकदी के बंडल मिले थे। रिपोर्ट में समिति ने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा नोटों के स्रोत, स्वामित्व या उनके वहां मौजूद होने को लेकर कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं दे सके।

समिति ने बाद की जांच प्रक्रिया पर भी चिंता जताई। रिपोर्ट में कहा गया कि महत्वपूर्ण सबूतों को न तो सही तरीके से सुरक्षित रखा गया और न ही संरक्षित किया गया। स्टोररूम की स्थिति को कानूनी तौर पर सील कर जांच किए जाने से पहले ही बदल दिया गया था। रिपोर्ट में बरामद नकदी के गायब होने या उपलब्ध न होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति ने कहा कि भौतिक साक्ष्यों के गायब होने की वजह घटनास्थल को सुरक्षित रखने में लापरवाही और आवास से जुड़े कर्मियों द्वारा स्टोररूम में की गई गतिविधियां थीं। हालांकि, समिति ने यह भी कहा कि उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि न्यायमूर्ति वर्मा ने स्वयं नकदी हटाई थी। समिति ने न्यायमूर्ति वर्मा के जवाब और खासकर 22 मार्च 2025 को दिए गए उनके लिखित स्पष्टीकरण की आलोचना करते हुए कहा कि यह असंतोषजनक था और इसमें स्पष्टता, पारदर्शिता तथा संस्थागत जवाबदेही का अभाव था।

यह रिपोर्ट दो खंडों में तैयार की गई है, जिसमें जांच के दौरान दर्ज मौखिक गवाहियां और दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं। इससे पहले तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति ने भी निष्कर्ष निकाला था कि जिस स्टोररूम से नकदी मिली थी, उस पर न्यायमूर्ति वर्मा का प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण था। उस समय दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायमूर्ति वर्मा को विवाद के बाद उनके मूल न्यायालय इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस स्थानांतरित कर दिया गया था। बाद में संसद ने उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, न्यायमूर्ति वर्मा के इस्तीफा देने के बाद यह प्रक्रिया प्रभावी रूप से समाप्त हो गई।


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