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रायपुर, 14 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / अमेरिका ने गुरुवार को भारत समेत 40 देशों को एक अदृश्य माल ढुलाई नेटवर्क का हिस्सा बताते हुए चीन की मदद करने का आरोप लगाया है। यह खुलासा द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम नामक रिपोर्ट में हुआ है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने जारी किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि इन देशों ने कम अमेरिकी आयात शुल्क वाले देशों के जरिए निर्यात करके चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचने में मदद की है।


रिपोर्ट जारी करते हुए नवारो का कहना कि 2018 के बाद यह प्रथा अधिक आम हो गई, जब ट्रंप प्रशासन ने पहली बार चीन पर उसकी अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के लिए धारा 301 के तहत टैरिफ लगाया था। उन्होंने अवैध ट्रांसशिपमेंट के मूल्य का अनुमान लगभग 60 अरब डॉलर (करीब 5.70 लाख करोड़ रुपये) लगाया है, जिससे अमेरिकी सरकार को टैरिफ राजस्व में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है।
ऐसे शिपमेंट का पता लगाने के लिए एआई का उपयोग होगा। नवारो ने जिन देशों को चीन के शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क के रूप में बताया है, उसमें अमेरिका के कई सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार शामिल हैं।


इनमें मेक्सिको और कनाडा से लेकर यूरोपीय संघ, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया भी हैं। दावा है कि इन्होंने चीन को अरबों डॉलर के टैरिफ से बचने में मदद की। नवारो ने कहा कि इस व्यवस्था ने कम्युनिस्ट चीन को 40 से अधिक देशों के जरिए अपने निर्यात को वैध बनाने की अनुमति दी थी। व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ने अवैध माल-ढुलाई नेटवर्क की उत्पत्ति 2018 से बताई है। तब ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ अमेरिका के बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए चुनिंदा चीनी वस्तुओं पर टैरिफ लगाया था।


रिपोर्ट के मुताबिक, टैरिफ के बाद, चीनी निर्यातकों ने तीसरे देशों के जरिए माल भेजा। जो उत्पाद पहले चीन से सीधे अमेरिका आते थे, उन्हें ऐसे देशों के जरिए भेजने लगे, जहां मामूली बदलाव करके दूसरे देश का उत्पाद बताना आसान था। चीनी माल को मामूली प्रसंस्करण, दोबारा लेबलिंग, पैकेजिंग, बिलिंग या शिपिंग मार्ग में परिवर्तन के लिए अन्य देशों से गुजारा गया, जिससे माल के मूल-देश से अलग होने का आभास हुआ, जबकि मूलरूप से माल चीनी ही रहा।


चीनी निर्माता और व्यापारिक कंपनियां कम श्रम लागत, सीमित सीमा शुल्क निरीक्षण, शिथिल मुक्त व्यापार क्षेत्रों या अमेरिकी बाजार तक अनुकूल पहुंच वाले स्थानों से माल का परिवहन करती हैं। रिपोर्ट में भारत के पुणे -गुजरात- चेन्नई विनिर्माण क्षेत्र का जिक्र है।
चीनी सामानों को कम टैरिफ दरों पर अमेरिका पहुंचाने में कौन देश कितना सक्षम है, इस आधार पर 40 देशों को 3 श्रेणियों में बांटा गया।
भारत, कनाडा, जापान, यूरोपीय संघ, इजरायल और मेक्सिको को पहली श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कथित नेटवर्क से भारत के कुछ विशिष्ट गलियारों को लाभ और अमेरिकी गलियारों को नुकसान हुआ। पुणे-गुजरात-चेन्नई गलियारे को इलेक्ट्रिक पंपों और कंप्रेसर के चीनी माल ढुलाई से लाभ, जबकि अमेरिकी शहरों को नुकसान हुआ। वाशिंगटन संदिग्ध माल हस्तांतरण की पहचान करने के लिए एआई का उपयोग करने की भी योजना बना रहा है। इससे इन सभी 40 देशों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी।


अमेरिका तीसरे देशों के जरिए अमेरिकी बाजारों में पहुंचने वाले सामानों का पता लगाने में मदद करने के लिए एआई -सक्षम डिटेक्टिव बॉर्डर प्रणाली तैनात करेगा। प्रणाली से शिपमेंट डेटा, रूटिंग इतिहास, उत्पाद वर्गीकरण, स्वामित्व संबंध, उत्पादन क्षमता और अन्य संकेतकों का विश्लेषण करने की उम्मीद है। वाशिंगटन संदिग्ध माल हस्तांतरण की पहचान करने के लिए एआई का उपयोग करने की भी योजना बना रहा है। इससे इन सभी 40 देशों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी।

अमेरिका तीसरे देशों के जरिए अमेरिकी बाजारों में पहुंचने वाले सामानों का पता लगाने में मदद करने के लिए एआई -सक्षम डिटेक्टिव बॉर्डर प्रणाली तैनात करेगा। प्रणाली से शिपमेंट डेटा, रूटिंग इतिहास, उत्पाद वर्गीकरण, स्वामित्व संबंध, उत्पादन क्षमता और अन्य संकेतकों का विश्लेषण करने की उम्मीद है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बना हुआ है। पिछले दिनों अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल निर्यात करने वाले भारत समेत 5 देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान किया है। प्रावधान से अमेरिका को चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मिलती है। पिछले साल अगस्त में अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया था, जिसे हटा दिया गया। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भी अंतिम रूप में है।


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