Suryapath Tiranga: The Suryapath Tiranga global relay has completed its journey across 40 countries.Suryapath Tiranga
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रायपुर, 16 अगस्त 2026/ Suryapath Tiranga : भारत के स्वतंत्रता दिवस को एक अनूठे वैश्विक समारोह के रूप में मनाते हुए सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले की शुरूआत हुई जिसमें तिरंगे ने उगते सूर्य का अनुसरण करते हुए दुनिया भर के अनेक देशों में यात्रा की।

सूर्यपथ तिरंगा यात्रा की शुरुआत भारतीय समयानुसार रात 1:30 बजे फिजी के सुवा से हुई, जहां रिले के पहले पड़ाव पर तिरंगा फहराया गया। फिजी से यह प्रतीकात्मक यात्रा उगते सूर्य के मार्ग का अनुसरण करते हुए पश्चिम की ओर न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कोरिया गणराज्य, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और म्यांमार से गुजरकर आगे बढ़ी।

प्रत्येक मिशन और पोस्ट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जिससे विभिन्न समय क्षेत्रों और महाद्वीपों में तिरंगे की विजुअल रिले जारी रही।

सुबह 8:00 बजे तक यह यात्रा बांग्लादेश पहुंच गई, जिसके बाद भूटान, नेपाल, श्रीलंका और मालदीव होते हुए आगे बढ़ी तथा पूरे क्षेत्र में भारत के गौरव और एकता का संदेश पहुंचाया।

रिले पश्चिम की ओर आगे बढ़ते हुए उज्बेकिस्तान और ओमान से होकर गुजरी और सुबह 9:45 बजे संयुक्त अरब अमीरात तथा अंततः भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे कतर पहुंची।

महज नौ घंटे में, तिरंगा प्रशांत क्षेत्र में दिन की पहली किरण से लेकर पश्चिम एशिया तक प्रतीकात्मक रूप से पहुंचा और एक साझा राष्ट्रीय प्रतीक के माध्यम से 21 देशों तथा मिशनों/पोस्टों को जोड़ा।

इस प्रकार सूर्यपथ तिरंगा ने उगते सूर्य को देशभक्ति की एक वैश्विक रिले में बदल दिया—यह संदेश देते हुए कि जहां कहीं सूर्य उदित होता है, वहां तिरंगे की भावना भी पहुंचती है, और हर घर तिरंगा 2026 के उत्सव में दुनिया भर के भारतीयों तथा भारत के मित्रों को एक सूत्र में जोड़ती है।

संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने कहा, “सूर्यपथ तिरंगा हमारे देश के शक्तिशाली प्रतीक—तिरंगे—के माध्यम से भारत की भावना को पूरी दुनिया तक पहुंचा रहा है।

उगते सूर्य के मार्ग का अनुसरण करते हुए यह अनूठी रिले हमारे मिशनों और भारतीय प्रवासियों को भारत की एकता, विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों के साझा उत्सव में जोड़ती है। यह दुनिया भर में रह रहे भारतीयों को निमंत्रण है कि वे एकजुट हों और विश्व के साथ भारत की स्थायी भावना को साझा करें।”

सूर्यपथ तिरंगा: पश्चिम एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका में यात्रा जारी

भारतीय समयानुसार सुबह 10:45 बजे से, सूर्यपथ तिरंगा पश्चिम की तरफ अपनी यात्रा जारी रखते हुए कुवैत, सऊदी अरब, इथियोपिया, रूस, केन्या, इजराइल, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका से आगे बढ़ा।

सिलसिलेवार ध्‍वज फहराते हुए, तिरंगे ने एक नए समय क्षेत्र और भौगोलिक क्षेत्र को पार किया तथा पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया में भारत के स्वतंत्रता दिवस की भावना का संदेश पहुंचाया।

दोपहर 12:30 बजे तक, रिले प्रिटोरिया पहुंच गई, जिसने प्रतीकात्मक रूप से भारतीय तिरंगे को अफ्रीकी महाद्वीप के विविध भू-दृश्यों और समुदायों से जोड़ दिया।

इसके बाद यात्रा यूरोप में प्रवेश कर गई, जहां क्रमशः लातविया, जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, मोरक्को और आइसलैंड में तिरंगा फहराया गया।

दोपहर 12:45 बजे रीगा से लेकर भारतीय समयानुसार अपराह्न 3:00 बजे रेक्याविक तक, इस रिले ने पूरे यूरोप में समारोहों की एक अद्भुत श्रृंखला बनाई, जिसने भारत के राष्ट्रीय ध्वज की वैश्विक पहुंच तथा विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों और समुदायों के साझा उत्साह को प्रदर्शित किया।

सूर्यपथ तिरंगा जैसे-जैसे पश्चिम की ओर आगे बढ़ा, यह यात्रा अटलांटिक महासागर को पार करते हुए अमेरिका महाद्वीप की ओर पहुंची। इसके अगले निर्धारित पड़ाव भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे ब्रासीलिया, ब्राजील और शाम 4:45 बजे पारामारिबो, सूरीनाम थे।

सुबह 1:30 बजे फिजी में तिरंगा फहराए जाने से लेकर अमेरिका महाद्वीप में अपनी आगे की यात्रा तक, तिरंगे ने सूर्य की गति को एक प्रभावशाली वैश्विक रिले में बदल दिया—एक ध्वज, जो प्रतीकात्मक रूप से महाद्वीपों की सीमाओं को पार करते हुए, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दुनिया भर के भारतीयों और भारत के मित्रों को एक सूत्र में जोड़ रहा है।

विदेश मंत्रालय के अपर सचिव श्री रणधीर जायसवाल ने कहा—“सूर्यपथ तिरंगा अभियान दुनिया भर में हमारी स्वतंत्रता का उत्सव मनाने का एक अनोखा तरीका है।

हम इस विशेष रिले समारोह के बीच में हैं, जिसकी शुरुआत फिजी से हुई और जो अब सूरीनाम को पार कर चुका है तथा अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में समाप्त होगा।

हमारे दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों और हर जगह लोगों के उत्साह एवं भागीदारी ने इस यात्रा को बेहद खास बना दिया है।”


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