Share This Article रायपुर, 20 अगस्त 2026/ Rakhi made of Vetiver : इस रक्षाबंधन भाइयों की कलाई पर बंधने वाली राखियां सिर्फ बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक नहीं रहेंगी, बल्कि पानी की एक बूंद पड़ते ही प्राकृतिक खुशबू भी बिखेरेंगी। छत्तीसगढ़ में खस की जड़ों से ऐसी अनोखी, पर्यावरण-अनुकूल और बायोडिग्रेडेबल राखियां तैयार की जा रही हैं, जो नमी के संपर्क में आते ही सोंधी खुशबू देने लगती हैं। वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से तैयार की जा रही इन राखियों में परंपरा, स्थानीय हुनर और वन संपदा का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। पानी पड़ते ही महकेगी राखी खस से तैयार इन राखियों की सबसे खासियत यह है कि पानी की बूंद, नमी या गीला होने पर इनमें से प्राकृतिक सुगंध निकलती है। बारिश के मौसम में या हाथ धोते समय राखी पर पानी पड़ने पर इसकी खुशबू भाई की कलाई को महका देगी। यानी इस बार रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर सिर्फ राखी नहीं बंधेगी, बल्कि बहन के स्नेह के साथ छत्तीसगढ़ की मिट्टी और प्रकृति की खुशबू भी बंधेगी। 10 महिलाओं ने तैयार की 1000 राखियां छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की पहल के तहत अन्नपूर्णा महिला स्व सहायता समूह, नारी जिला धमतरी की 10 महिलाओं ने इन विशेष राखियों को तैयार किया है। कुल 1000 राखियां तैयार की गई हैं। इन राखियों को पारंपरिक भावनाओं और आधुनिक सोच के मेल के रूप में देखा जा रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से परंपरा और नवाचार का संगम वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशानुरूप वन संपदा और पारंपरिक औषधीय एवं सुगंधित पौधों से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इसी पहल के तहत खस जैसी सुगंधित वनस्पति का उपयोग कर राखियों को नया स्वरूप दिया गया है। बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम और उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला के मार्गदर्शन में यह कार्य किया गया है। पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं राखियां खस से बनी ये राखियां पूरी तरह प्राकृतिक, हाथ से निर्मित और बायोडिग्रेडेबल बताई गई हैं। इसके चलते ये पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं और पारंपरिक राखियों के साथ एक प्राकृतिक विकल्प प्रस्तुत करती हैं। इस पहल का उद्देश्य सिर्फ रक्षाबंधन को खास बनाना नहीं, बल्कि वन आधारित उत्पादों को बाजार से जोड़कर स्थानीय हुनर और आजीविका को बढ़ावा देना भी है। छत्तीसगढ़ की वन संपदा को मिल रही नई पहचान खस जैसी उपयोगी वनस्पतियों से नए उत्पाद तैयार कर पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय कौशल को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीण एवं स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि इस रक्षाबंधन बहन के प्यार से भाई की कलाई महकेगी। जब खस से बनी राखी पर पानी की बूंद पड़ेगी और वह महकेगी, तब भाई को बहन के स्नेह के साथ छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा की खुशबू भी महसूस होगी। Share This Article Post navigation Infant Protection Month : विशेष लेख…! शिशु संरक्षण माह: स्वस्थ बचपन और सुरक्षित भविष्य का आधार Sonamani Bora : नगरीय प्रशासन के नए प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की मैराथन बैठक…! कचरा पृथक्करण से नालंदा परिसर तक दिए बड़े निर्देश