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रायपुर, 25 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / छत्तीसगढ़ में अब डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों से निपटने के लिए मरीज मिलने का इंतजार नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग सभी जिलों में मच्छरों की इलाकेवार स्कैनिंग कराने की तैयारी कर रहा है।

विशेष तकनीक से यह पता लगाया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-सी बीमारी फैलाने वाले मच्छर मौजूद हैं। इसके आधार पर उसी इलाके में पहले से रोकथाम के उपाय किए जाएंगे।

मच्छर बताएंगे कहां है बीमारी का खतरा

सर्वे में यह पहचानने की कोशिश होगी कि अलग-अलग क्षेत्रों में मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया, चिकनगुनिया, जीका और जापानी इंसेफलाइटिस फैलाने वाले मच्छरों की मौजूदगी कहां है। इसके लिए विशेष डिवाइस और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ करेंगे सहयोग

स्वास्थ्य विभाग ने इस सर्वे के लिए अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी समेत देश-विदेश की विशेषज्ञ संस्थाओं के साथ सहयोग की तैयारी की है। विशेषज्ञ मच्छरों की पहचान कर उनके जरिए फैलने वाली संभावित बीमारियों का आकलन करेंगे।

बीमारी फैलने से पहले रोकथाम पर जोर

छत्तीसगढ़ में हर साल 20 हजार से अधिक लोग मलेरिया की चपेट में आने और औसतन 40-50 मौतों की जानकारी सामने आती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य बीमारी फैलने के बाद मरीज खोजने के बजाय खतरे वाले क्षेत्रों की पहले पहचान कर रोकथाम शुरू करना है।

डब्ल्यूएचओ की बैठक में बनी रणनीति

नवा रायपुर में आयोजित डब्ल्यूएचओ की दो दिवसीय पार्टनर्स कंसल्टेटिव मीटिंग में स्वास्थ्य विभाग, डब्ल्यूएचओ तथा देश-विदेश की संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में मच्छर सर्वे सहित विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग को लेकर चर्चा हुई।


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