Share This Article रायपुर, 30 अगस्त 2026/ Hanging Glaciers : हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों से जुड़ा खतरा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। एक स्टडी में उत्तराखंड के अलकनंदा बेसिन में 219 हैंगिंग ग्लेशियर की पहचान की गई है। विशेषज्ञों की चिंता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इन ग्लेशियरों के अस्थिर होने या टूटने की स्थिति में बड़े हिमस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इनका असर पहाड़ी बस्तियों के साथ-साथ सड़कों, पुलों और दूसरे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर भी पड़ सकता है। क्या होते हैं Hanging Glaciers? हैंगिंग ग्लेशियर यानी लटके हुए हिमनद बर्फ और हिम का ऐसा विशाल द्रव्यमान होता है, जो किसी पहाड़ की खड़ी या बेहद ढलानदार चट्टानी सतह पर जमा या लटका हुआ रहता है। सामान्य ग्लेशियरों के विपरीत इनका बड़ा हिस्सा ढलान के किनारे या ऊंचाई पर स्थित दिखाई देता है। ऐसे ग्लेशियर जब अस्थिर होते हैं तो उनका कुछ हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर सकता है। टूटे तो कैसे मच सकती है तबाही? अगर कोई हैंगिंग ग्लेशियर अचानक टूटता है तो बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टान तेज रफ्तार से नीचे की ओर आ सकती है। इससे, भीषण हिमस्खलन हो सकता है। घाटियों में अचानक बाढ़ आ सकती है। नदियों का प्रवाह बाधित हो सकता है। पहाड़ी बस्तियों को नुकसान पहुंच सकता है। सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचा प्रभावित हो सकता है। यानी पहाड़ की ऊंचाई पर दिखाई देने वाला ग्लेशियर टूटने की स्थिति में नीचे बसे इलाकों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। अलकनंदा बेसिन में 219 ग्लेशियरों की पहचान स्टडी में उत्तराखंड के अलकनंदा बेसिन में 219 हैंगिंग ग्लेशियर चिन्हित किए गए हैं। अलकनंदा बेसिन हिमालय के संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है और यहां ग्लेशियरों में होने वाले बदलावों का असर नीचे की घाटियों तक पहुंच सकता है। इन ग्लेशियरों की पहचान इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है ताकि संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी और आपदा प्रबंधन की तैयारी को बेहतर किया जा सके। भारत के लिए क्यों है बड़ा खतरा? हिमालय भारत के लिए सिर्फ प्राकृतिक जल स्रोत ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में आबादी और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे वाला संवेदनशील क्षेत्र भी है। हैंगिंग ग्लेशियरों के टूटने से पैदा होने वाली घटनाओं का खतरा खासतौर पर उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में गंभीर हो सकता है, जहां घाटियों में सड़कें, गांव, पर्यटन स्थल और अन्य निर्माण मौजूद हैं। ग्लेशियरों पर नजर रखना क्यों जरूरी? हैंगिंग ग्लेशियरों की निगरानी इसलिए अहम है क्योंकि इनके टूटने की घटना अचानक हो सकती है। संभावित रूप से अस्थिर ग्लेशियरों की पहचान, उनकी नियमित निगरानी और समय रहते चेतावनी की व्यवस्था जान-माल के नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। Share This Article Post navigation Nepal Flood Dead body : नेपाल बाढ़ में मिले लावारिस शवों की होगी पहचान…! हर कब्र की वीडियो-फोटोग्राफी और जियो-टैगिंग India Foreign Policy : भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों में नया अध्याय…! रणनीतिक साझेदारी पर लगी मुहर; व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर सहमति