Share This Article रायपुर, 30 अगस्त 2026/ Digital India : सूरजपुर जिले के मसीरा गांव की लक्ष्मनिया दीदी कभी घर की चारदीवारी तक सीमित थीं। आज वही महिला गांव में डिजिटल सेवाओं की पहचान बन चुकी हैं। बैंक मित्र से बीसी सखी तक का सफर तय कर उन्होंने आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की और अपनी कमाई से इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी व पक्का मकान बनाकर ‘लखपति दीदी’ बनीं। बैंक मित्र से बीसी सखी तक बढ़े कदम लक्ष्मनिया दीदी ने वर्ष 2021 में बैंक मित्र के रूप में काम शुरू किया। दो साल बाद 2023 में वे बीसी सखी बनीं। काम के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ा और वे परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाने लगीं। गांव में घर बैठे मिल रहीं डिजिटल सुविधाएं आज उनका अपना सीएससी सेंटर है। यहां ग्रामीणों को नगद जमा-निकासी, खाता खोलने, एग्रीस्टैक, पीएम किसान, बिजली बिल भुगतान और मोबाइल रिचार्ज जैसी कई सेवाएं मिल रही हैं। पहले इन कामों के लिए ग्रामीणों को पास के शहर भैयाथान या बसदेई जाना पड़ता था। अब समय और आने-जाने के खर्च दोनों की बचत हो रही है। मेहनत से खरीदी स्कूटी, बनवाया पक्का मकान आर्थिक आत्मनिर्भरता ने लक्ष्मनिया दीदी के सपनों को भी नई उड़ान दी। उन्होंने अपनी कमाई से इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी खरीदी और पक्का मकान बनवाया। शासन से मिले सहयोग, शून्य प्रतिशत ब्याज पर 60 हजार रुपये की सहायता, बैंक लिंकेज और कम ब्याज पर ऋण ने उनके सफर को मजबूती दी। ‘ बिहान’ ने दिखाया आगे बढ़ने का रास्ता राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद लक्ष्मनिया दीदी को अपनी क्षमता को पहचानने और आगे बढ़ने का अवसर मिला। उनकी कहानी बताती है कि अवसर, मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले तो गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर पूरे समाज के लिए मिसाल बन सकती हैं। Share This Article Post navigation अटल आरोग्य लैब : रायगढ़ जिला चिकित्सालय में 25 हजार 835 जांचें पूरी, 134 प्रकार की जांच निःशुल्क Muktakashi Manch पर दिखेगा लोक-संगीत और आधुनिक सुरों का संगम…! रायपुर में 1 से 3 सितंबर तक सजेगा ‘रंग-तरंग’