Share This Article रायपुर, 03 सितंबर / ETrendingIndia / अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच रूस पर ईरान के उन्नत मिसाइल कार्यक्रम को गुप्त रूप से तकनीकी सहयोग देने का आरोप लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने वर्ष 2023 से एक गुप्त कार्यक्रम के तहत ईरान को अत्याधुनिक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने में सहायता दी है। दावा है कि इस सहयोग का उद्देश्य ईरान की पश्चिम एशिया में अमेरिकी विमानवाहक पोतों और अन्य युद्धपोतों को निशाना बनाने की क्षमता बढ़ाना था। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने ‘सी-430एलÓ नामक कार्यक्रम के माध्यम से ईरान के साथ मिसाइल तकनीक साझा की। इस कार्यक्रम में रूस के अनुभवी मिसाइल विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया था। विशेषज्ञों का मुख्य उद्देश्य ईरान को ऐसी रैमजेट प्रणोदन प्रणाली विकसित करने में सहायता करना था, जो क्रूज मिसाइलों को ध्वनि की गति से कई गुना अधिक गति प्रदान कर सके। रैमजेट एक ऐसी वायु-श्वसन प्रणोदन प्रणाली है, जिसमें तेज गति से आगे बढ़ते समय वातावरण से हवा लेकर उसका उपयोग इंजन में ईंधन जलाने के लिए किया जाता है। इस तकनीक के माध्यम से मिसाइल को अत्यधिक गति से उड़ाने में मदद मिल सकती है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गति और कम ऊंचाई पर उड़ान का संयोजन ऐसी मिसाइलों को पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकता है। कम ऊंचाई पर उडऩे वाली तेज गति की मिसाइल का पता लगाने और उस पर प्रतिक्रिया करने के लिए रक्षा प्रणालियों को अपेक्षाकृत कम समय मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सी-430एल कार्यक्रम वर्ष 2023 में शुरू हुआ था। इसमें रूस की सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट और मिसाइल निर्माता कंपनी एनपीओ माशिनोस्ट्रोयेनिया के शामिल होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट कथित रूप से लीक हुए रूसी पत्राचार, यात्रा संबंधी अभिलेखों और सैन्य पेटेंट के विश्लेषण पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि ईरान को इस तकनीकी सहयोग की तैयारी वर्ष 2023 से पहले ही शुरू हो गई थी। ईरान लंबे समय से रैमजेट तकनीक विकसित करने के प्रयास कर रहा है। ईरानी मीडिया ने वर्ष 2023 में रैमजेट के नमूना उपकरणों के परीक्षण की जानकारी दी थी। इससे पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने वर्ष 2019 में मिसाइल विकास से जुड़े एक केंद्र का निरीक्षण भी किया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस की भूमिका ईरान को इस तकनीक से जुड़ी जटिल तकनीकी चुनौतियों से निपटने में सहायता करने की थी।रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने रूस के सहयोग से इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का प्रयास इसलिए किया, ताकि पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी नौसैनिक संसाधनों के खिलाफ अपनी मारक क्षमता को मजबूत किया जा सके। सैन्य और मिसाइल विशेषज्ञों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में जहाज-रोधी और जमीनी लक्ष्यों पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलों में किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ऐसी मिसाइलें सुपरसोनिक गति के साथ कम ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम होती हैं, तो पश्चिमी वायु रक्षा प्रणालियों के लिए उन्हें समय रहते पहचानना और रोकना अधिक कठिन हो सकता है। रूस और ईरान के बीच सैन्य एवं तकनीकी सहयोग का यह कथित कार्यक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। हालांकि, रिपोर्ट में किए गए रूसी सहयोग संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। Share This Article Post navigation नेपाल आपदा : अब तक 166 भारतीयों का रेस्क्यू… कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 410 भारतीय चीन से लौटे तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप, नेपाल-चीन में भी महसूस किए गए झटके