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रायपुर, 08 सितंबर / ETrendingIndia / सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाडिय़ों की परिभाषा और उनके संरक्षण से जुड़े मामले में उच्चाधिकार प्राप्त समिति को अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने समिति को दिन-रात काम कर 30 नवंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके बाद किसी और विस्तार का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जताते हुए कहा कि समिति को फरवरी 2027 तक समय मांगने के बजाय दिन-रात काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समिति दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यदि समिति ऐसा करने में सक्षम नहीं है तो अदालत को बताया जाए, ताकि समिति का पुनर्गठन किया जा सके।

मुख्य न्यायाधीश ने रिपोर्ट में देरी को लेकर अपनी असहमति जाहिर करते हुए कहा कि समिति को छह महीने का समय मांगने के बजाय अदालत से यह अनुरोध करना चाहिए था कि रिपोर्ट उनके सेवानिवृत्त होने के बाद प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि फरवरी 2027 तक समय बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने कहा कि समिति को अंतरिम रिपोर्ट के बजाय अदालत के समक्ष अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि अंतरिम रिपोर्ट भी पर्याप्त होगी और अदालत उसका परीक्षण करेगी, लेकिन छह महीने का विस्तार मांगना उचित तरीका नहीं है।

एक अन्य अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि समिति ने उनके मुवक्किल की बात नहीं सुनी है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि संबंधित पक्ष अपनी सामग्री समिति के सामने रख सके।

इस पर पीठ ने कहा कि उसने सभी हितधारकों की सुनवाई के संबंध में पहले ही आदेश पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सभी के हित में यही होगा कि समिति जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे, ताकि जिन गतिविधियों या प्रस्तावों को अनुमति दी जा सकती है, उन्हें अनुमति मिल सके और जो अनुमति योग्य नहीं हैं, उन पर रोक लगाई जा सके।

पीठ ने कहा कि सोमवार की सुनवाई में उसकी मुख्य चिंता उच्चाधिकार प्राप्त समिति की ओर से प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्ट को लेकर है। समिति ने व्यापक रिपोर्ट तैयार करने के लिए छह महीने यानी 28 फरवरी 2027 तक का समय मांगा था।

अदालत ने शुरुआत में ही समिति के इस अनुरोध को खारिज कर दिया। पीठ ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति को दिन-रात काम कर 30 नवंबर 2026 तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब आगे कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा। हालांकि, समिति को सलाह दी गई कि वह इस बीच प्रमुख मुद्दों को अलग करके एक अंतरिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर सकती है। इससे अदालत को उन मुद्दों के समाधान में मदद मिलेगी, जिन पर अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दिसंबर के पहले सप्ताह में निर्धारित की है। इससे पहले पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त अरावली उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट पूरी करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा था। समिति ने इसके लिए स्थानिक, पारिस्थितिक, भूवैज्ञानिक, जलवैज्ञानिक, सामाजिक-आर्थिक और हितधारकों से प्राप्त साक्ष्यों को एकीकृत करने की आवश्यकता का हवाला दिया था।


31 अगस्त को दाखिल अपने अनुपालन पत्र में समिति ने कहा था कि नाजुक अरावली पर्वत श्रृंखला का केवल ‘व्यापक और बचाव योग्यÓ आकलन ही उसके निष्कर्षों को उचित ठहरा सकता है। इसी वजह से उसने अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय-सीमा बढ़ाकर 28 फरवरी 2027 करने का अनुरोध किया था।


समिति ने अरावली क्षेत्र का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए 6 से 11 अगस्त के बीच क्षेत्रीय दौरे किए थे। इन दौरों के दौरान जनसुनवाई भी आयोजित की गई थी। समिति का कहना था कि अरावली से जुड़े मुद्दे केवल तकनीकी सीमांकन तक सीमित नहीं हैं। समिति के अनुसार, इन मुद्दों का समाधान केवल किसी एक क्षेत्र-आधारित मानदंड या साक्ष्य के किसी एक स्रोत के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए अरावली के व्यापक भूवैज्ञानिक, भूआकृतिक, जलवैज्ञानिक, जैव-भौगोलिक, पारिस्थितिक, जैव विविधता, खनिज संसाधन और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं का अध्ययन आवश्यक है।


सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मई में एक आदेश के माध्यम से उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया था। समिति अरावली की परिभाषा और सीमांकन से संबंधित केंद्र सरकार की रिपोर्ट की स्वतंत्र रूप से समीक्षा कर रही है। समिति के लिए अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने की मूल समय-सीमा 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई थी। समिति ने इसी समय-सीमा को बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने छह महीने का विस्तार देने से इनकार करते हुए अब 30 नवंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।


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