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 रायपुर, 08 सितंबर / ETrendingIndia / इंडोनेशिया के प्रसिद्ध अनाक क्राकाटाऊ ज्वालामुखी में लगातार कई विस्फोट होने के बाद देश में हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ज्वालामुखी से निकली राख का गुबार करीब 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया है। राख के फैलाव और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण राजधानी जकार्ता के दोनों प्रमुख हवाई अड्डों सहित देश के आठ हवाई अड्डों को लगातार दूसरे दिन बंद रखना पड़ा है।


हवाई अड्डों के बंद होने से 2,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जबकि करीब 2.70 लाख यात्री विभिन्न स्थानों पर फंस गए हैं। प्रभावित हवाई अड्डों पर यात्रियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और विमान सेवाएं सामान्य होने का इंतजार किया जा रहा है।


जकार्ता के सोकार्नो-हट्टा और हलीम परदानकुसुमा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के अलावा तीन अन्य हवाई अड्डों को सोमवार स्थानीय समयानुसार शाम छह बजे तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है। बाली के मुख्य हवाई अड्डे को भी बंद रखा गया है।


इंडोनेशिया के परिवहन मंत्री डुडी पुरवागांधी ने कहा कि मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है, इसलिए यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि स्थिति कब सामान्य होगी।


इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी के अनुसार, रविवार सुबह 3 बजकर 53 मिनट पर अनाक क्राकाटाऊ में करीब 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ। इसके लगभग तीन घंटे बाद एक और छोटा विस्फोट दर्ज किया गया।


एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया के अनुसार, जुलाई से ज्वालामुखी की गतिविधियां तेज हो गई थीं। उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में ज्वालामुखी से और विस्फोट होने की संभावना बनी हुई है।


उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में ज्वालामुखी से निकलने वाली राख के बड़े गुबार का पता चला है। एक राख का बादल करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंचा और जकार्ता, बेंटेन तथा पश्चिम जावा के ऊपर से गुजरा।


वहीं, दूसरा बड़ा राख का गुबार लगभग 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। यह बेंटेन, लाम्पुंग और बेंग्कुलु प्रांतों के ऊपर से फैलते हुए सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के एक हिस्से तक पहुंच गया। राख के कारण हवाई यातायात के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर स्कूली कक्षाएं ऑनलाइन संचालित की जा रही हैं। समुद्री यातायात पर भी इसका कुछ असर पड़ा है।


अनाक क्राकाटाऊ ज्वालामुखी इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से करीब 150 किलोमीटर दूर जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच स्थित है। ‘अनाक क्राकाटाऊÓ का अर्थ ‘क्राकाटाऊ का बच्चाÓ है। दरअसल, वर्ष 1883 में इसी क्षेत्र में स्थित मुख्य क्राकाटाऊ ज्वालामुखी में बेहद शक्तिशाली विस्फोट हुआ था। इस विनाशकारी घटना में करीब 36,000 लोगों की मौत हुई थी और इसका प्रभाव दूर-दूर तक महसूस किया गया था।


मुख्य क्राकाटाऊ के विनाश के कई दशक बाद वर्ष 1927 में समुद्र के नीचे हुए ज्वालामुखी विस्फोट के परिणामस्वरूप इसी क्षेत्र में एक नया ज्वालामुखी उभरा। इसे अनाक क्राकाटाऊ नाम दिया गया, जिसका अर्थ ही ‘क्राकाटाऊ का बच्चाÓ है।


अनाक क्राकाटाऊ का इतिहास बेहद विनाशकारी घटनाओं से जुड़ा रहा है। दिसंबर 2018 में ज्वालामुखी का एक हिस्सा समुद्र में ढह गया था, जिसके बाद एक विशाल सुनामी आई थी। इस प्राकृतिक आपदा में 400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।


मौजूदा स्थिति को देखते हुए इंडोनेशियाई अधिकारी ज्वालामुखी की गतिविधियों और राख के फैलाव पर लगातार निगरानी रख रहे हैं। फिलहाल विमान सेवाओं की बहाली मौसम और राख के गुबार की स्थिति सामान्य होने पर निर्भर करेगी।


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