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रायपुर, 8 सितंबर 2026/ ETrendingIndia / साइबर वित्तीय अपराधों पर तेजी से कार्रवाई और वैज्ञानिक तरीके से जांच को मजबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस ने विशेष कार्यशाला आयोजित की।

रायपुर में हुई ‘न्यू ऐज फिनांसियल क्राइम्स एंड रिस्पॉन्स रेडनेस’ कार्यशाला में प्रदेशभर के करीब 300 पुलिस अधिकारी और विवेचक शामिल हुए।

ऑनलाइन निवेश ठगी, UPI फ्रॉड, क्रिप्टो अपराध और डिजिटल साक्ष्यों की जांच का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों पर फोकस

विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने पुलिस अधिकारियों को साइबर अपराध के बदलते स्वरूप की जानकारी दी। प्रशिक्षण में ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, क्रिप्टोकरेंसी अपराध, म्यूल बैंक खाते, फर्जी पहचान, UPI और इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड, QR कोड ठगी और रिमोट डिवाइस कंट्रोल जैसे मामलों की जांच समझाई गई।

‘स्वर्णिम समय’ में कार्रवाई सबसे जरूरी

कार्यशाला में बताया गया कि साइबर ठगी की शिकायत मिलते ही संदिग्ध लेन-देन की पहचान और धनराशि रोकने की कार्रवाई बेहद अहम है।

पुलिस को बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ तत्काल समन्वय कर ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने पर विशेष जोर दिया गया।

पैसे ट्रांजेक्शन चेन को ट्रैक करने की तकनीक

वास्तविक मामलों के आधार पर अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करने, डिजिटल फुटप्रिंट पहचानने और बैंक खाते से म्यूल अकाउंट होते हुए अंतिम लाभार्थी तक पैसे की पूरी ट्रांजेक्शन चेन को ट्रैक करने की तकनीक बताई गई।

केस स्टडी से बढ़ी जांच की क्षमता

कार्यशाला में अधिकारियों ने साइबर अपराध की जांच में आने वाली मैदानी चुनौतियां साझा कीं।

विशेषज्ञों ने केस स्टडी और प्रश्नोत्तर के जरिए समाधान बताए। पुलिस का लक्ष्य साइबर अपराधों में तेज प्रतिक्रिया, बेहतर तकनीकी इस्तेमाल और वैज्ञानिक जांच को और मजबूत करना है।


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