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रायपुर, 15 सितंबर / ETrendingIndia / ओमान में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और खाड़ी देशों के बीच प्रस्तावित बैठक टलने के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। बैठक टलने का असर अब सऊदी अरब पर भी दिखाई देने लगा है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमलों की नई लहर शुरू कर दी है। हूतियों ने दक्षिणी सऊदी अरब के खमीस मुशैत स्थित एक सैन्य हवाई अड्डे को निशाना बनाया। हूतियों के मुताबिक, हमले में दर्जनों मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। सैन्य हवाई अड्डे पर विमान हैंगर, रडार प्रणाली, हवाई पट्टी और गोला-बारूद भंडार को निशाना बनाया गया।


यमनी अधिकारियों के अनुसार, हूती विद्रोही लाल सागर के किनारे यमन के पश्चिमी हिस्से में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। अचानक हुए हमलों के बाद सऊदी राजधानी रियाद में अधिकारियों के बीच आपात बैठकें और चर्चा शुरू हो गई है। सऊदी अधिकारियों ने खमीस मुशैत के अलावा दक्षिणी क्षेत्र के तीन अन्य शहरों में भी आपातकालीन चेतावनी जारी की है। यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि हूतियों के हमलों में 13 नागरिक घायल हुए हैं।


हूतियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब की ओर से यमन में किए गए हवाई हमलों के जवाब में उसने खमीस मुशैत के सैन्य हवाई अड्डे पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। हूती विद्रोहियों के हमलों के जवाब में सऊदी अरब और यमन की वायु सेनाओं ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों में लाल सागर के किनारे स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह मोचा के आसपास के इलाके भी शामिल हैं।


यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के अधिकारियों का कहना है कि हूती विद्रोहियों का लाल सागर से लगे यमन के अधिकांश पश्चिमी हिस्से पर अब भी नियंत्रण है। एक यमनी अधिकारी ने कहा कि हूतियों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इसके जवाब में वे सऊदी अरब पर हमले बढ़ा रहे हैं और मिसाइल तथा ड्रोन हमलों की तीव्रता बढ़ा रहे हैं।


खाड़ी देशों ने ईरान के साथ प्रस्तावित बातचीत को टाल दिया है। यह बैठक ओमान में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर होनी थी। बैठक टलने से क्षेत्रीय संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका बढ़ गई है। यदि मध्य पूर्व में संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।


हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है। इसमें लाल सागर के मुहाने के पास स्थित पेरीम द्वीप पर कब्जा करना भी शामिल बताया जा रहा है। इससे सऊदी अरब के तेल निर्यात पर दबाव और बढ़ गया है।


गुरुवार को हुए एक हवाई हमले के बाद सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन का संचालन बंद हो गया था। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है।


सऊदी अरब ने 1980 के दशक में होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन के जोखिम को कम करने के लिए खाड़ी क्षेत्र से लाल सागर तक करीब 1,200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण किया था। उस समय ईरान-इराक युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही पर खतरा बढ़ गया था।

तेल कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही भी लगभग रुक जाती है, तो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब चार प्रतिशत प्रभावित हो सकता है। हालांकि, सऊदी अरब ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन का संचालन दोबारा कब शुरू किया जाएगा।


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