Share This Article

रायपुर, 16 सितंबर 2026। ETrendingIndia / दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की चेन्नई स्थित संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले में श्रीदेवी के पति बोनी कपूर और उनकी बेटियों जाह्नवी कपूर तथा खुशी कपूर को नोटिस जारी किया है। साथ ही दोनों पक्षों को आपसी बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी। तब तक संपत्ति के हस्तांतरण, निर्माण और कब्जे की स्थिति में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा।


यह मामला एमसी शिवकामी और एमसी नटराजन की याचिका से जुड़ा है। दोनों ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर की याचिका पर उनके द्वारा दायर मुकदमा खारिज कर दिया गया था।
विवादित संपत्ति चेन्नई के ईसीआर इलाके में स्थित है और इसका संबंध एमसी चंद्रशेखरन के परिवार से बताया गया है। याचिकाकर्ताओं ने संपत्ति पर अपने अधिकार का दावा करते हुए अदालत का रुख किया था। हालांकि, बोनी कपूर और उनकी बेटियों ने इस दावे का विरोध करते हुए मुकदमे को खारिज करने की मांग की थी।


मामले की शुरुआत में निचली अदालत ने मुकदमा खारिज करने से इनकार कर दिया था। अदालत का कहना था कि कपूर परिवार की दलीलों पर सुनवाई के दौरान ही इस संबंध में फैसला किया जाएगा।


निचली अदालत के आदेश के खिलाफ बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर ने मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया। कपूर परिवार ने उच्च न्यायालय में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं ने संपत्ति से संबंधित पुराने दावों और महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी अदालत से छिपाई थी।
मद्रास उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के दावे पर विचार करते हुए कहा कि वे संपत्ति के मुख्य वारिस नहीं हैं और इसलिए इस तरह का मुकदमा दायर करने के हकदार नहीं हैं। अदालत ने यह भी माना कि वर्ष 1988 के बैनामा विलेखों पर वर्ष 2023 में, यानी करीब 40 वर्ष बाद, सवाल उठाना काफी देरी से उठाया गया दावा है।


इन्हीं आधारों पर उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी थी। अब याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। शीर्ष अदालत यह जांच करेगी कि मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला सही था या नहीं।


सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद विवादित संपत्ति की मौजूदा स्थिति बरकरार रहेगी। अगली सुनवाई तक न तो संपत्ति का हस्तांतरण किया जा सकेगा, न कोई नया निर्माण किया जा सकेगा और न ही कब्जे की स्थिति में बदलाव किया जा सकेगा।


अदालत ने दोनों पक्षों को बातचीत और मध्यस्थता के जरिए विवाद का समाधान तलाशने का सुझाव भी दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।


Share This Article