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बेंगलुरु, 19 सितंबर 2026। Defence Projects : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा और एयरोस्पेस परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर सख्त चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में देरी से सैन्य जरूरतों को पूरा करने में क्षमता का अंतर पैदा हो सकता है, लागत बढ़ सकती है और उत्पादन तक पहुंचते-पहुंचते विकसित तकनीक अप्रासंगिक होने का जोखिम रहता है। राजनाथ सिंह ने परियोजनाओं के लिए व्यावहारिक समयसीमा तय करने और विकास से उत्पादन तक की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया।

देरी हुई तो बढ़ेगी चुनौती, तकनीक पड़ सकती है पीछे

राजनाथ सिंह ने कहा कि महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं में देरी को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उनके मुताबिक, किसी तकनीक या उपकरण के विकास और उत्पादन में ज्यादा समय लगने पर दुनिया में उससे बेहतर तकनीक सामने आ सकती है। ऐसे में परियोजना पूरी होने के समय उसका तकनीकी लाभ कम हो सकता है। इसलिए रक्षा जरूरतों से जुड़ी परियोजनाओं की समयसीमा वास्तविक और प्रभावी रखनी जरूरी है।

एक ही कार्यक्रम में Tejas, HTT-40 और Dhruv NG की सौगात

बेंगलुरु में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारतीय वायुसेना को 2 LCA Tejas FOC ट्विन-सीटर ट्रेनर और 3 HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमान सौंपे। इसके साथ ही 4 Dhruv Next Generation (NG) हेलीकॉप्टर पवन हंस लिमिटेड को दिए गए। यह कार्यक्रम स्वदेशी सैन्य और नागरिक एयरोस्पेस क्षमता के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।

राजनाथ का वैज्ञानिकों को संदेश- आज की नहीं, कल की तकनीक बनाइए

रक्षा मंत्री ने युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डिजाइनरों, टेस्ट पायलटों और तकनीकी विशेषज्ञों से ऐसी अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने का आह्वान किया जो आज मौजूद नहीं है। उन्होंने रिसर्च एंड डेवलपमेंट को प्राथमिकता देने और आने वाले दशक में भारत को वैश्विक एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने वाली क्षमताएं विकसित करने पर जोर दिया।

🇮🇳 आत्मनिर्भर एयरोस्पेस की ओर बड़ा कदम

राजनाथ सिंह ने सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। उन्होंने एआई, स्वायत्त प्रणालियों, मानवरहित हवाई प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, साइबर तकनीक और अगली पीढ़ी के प्रणोदन जैसी क्षमताओं के स्वदेशी विकास और एकीकरण पर जोर दिया। सरकार के अनुसार, Tejas ट्रेनर, HTT-40 और Dhruv NG की डिलीवरी भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


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