Share This Article नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026। Environment Ministry : दिल्ली-एनसीआर समेत पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने नए नियमों का मसौदा प्रस्तावित किया है। इसके तहत जिस खेत में पराली जलाने की घटना दर्ज या साबित होगी, उस भूमि को घटना की तारीख से 15 महीने तक ‘रेड कैटेगरी’ यानी खतरनाक श्रेणी में रखा जाएगा। हालांकि, इस श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद जमीन पर लागू होने वाले कानूनी और व्यावहारिक प्रतिबंधों को लेकर मसौदे में अभी पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। पराली जलाई तो 15 महीने तक ‘रेड कैटेगरी’ में रहेगा खेत बुधवार को जारी मसौदा नियमों के अनुसार, यदि संबंधित भूमि पर दोबारा पराली जलाने की घटना सामने आती है या साबित होती है, अथवा निर्धारित पर्यावरण मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता है, तो खतरनाक श्रेणी अगले 15 महीने की अवधि तक लागू रहेगी। इस प्रस्ताव का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए खेतों को लेकर एक निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था मजबूत करना है। खेत के हिसाब से ₹5 हजार से ₹30 हजार तक जुर्माना मसौदे में पराली जलाने पर पर्यावरण मुआवजे की 2023 में तय दरों को बरकरार रखा गया है। इसके तहत दो एकड़ से कम कृषि भूमि पर पराली जलाने के लिए ₹5,000, दो से पांच एकड़ भूमि के लिए ₹10,000 और पांच एकड़ से अधिक जमीन के लिए ₹30,000 का पर्यावरण मुआवजा लगाया जाएगा। यानी खेत का आकार बढ़ने के साथ मुआवजे की राशि भी बढ़ेगी। वसूले गए पैसे से किसानों के लिए बनेगी व्यवस्था मसौदा नियमों में पर्यावरण मुआवजे से मिलने वाली राशि के इस्तेमाल का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत वसूली गई राशि का उपयोग फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, बायोमास के उपयोग और भंडारण से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करने तथा फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा। 60 दिन में मांगे सुझाव, फिर तय होगी आगे की प्रक्रिया पर्यावरण मंत्रालय ने प्रस्तावित नियमों पर संबंधित हितधारकों से 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। यानी फिलहाल ये नियम मसौदा स्तर पर हैं और अंतिम रूप दिए जाने से पहले प्राप्त सुझावों पर विचार किया जाएगा। खास तौर पर ‘रेड कैटेगरी’ में रखे गए खेतों पर इसके वास्तविक कानूनी और व्यावहारिक प्रभाव को लेकर अंतिम नियमों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। Share This Article Post navigation Defence Projects में देरी पर राजनाथ की दो टूक, बोले- समय पर काम नहीं हुआ तो पुरानी पड़ सकती है स्वदेशी तकनीक