Fuel crisis deepensFuel crisis deepens
Share This Article

 रायपुर, 21सितंबर 2026 / ETrendingIndia /पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य समेत प्रमुख समुद्री तेल मार्गों में पैदा हुई बाधाओं का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। फ्रांस में ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 18 सितंबर की सुबह तक देश के करीब 11 प्रतिशत पेट्रोल पंपों पर कम से कम एक प्रकार के ईंधन की उपलब्धता प्रभावित थी। यानी लगभग हर नौ में से एक पेट्रोल पंप को आपूर्ति संबंधी समस्या का सामना करना पड़ रहा था।


ईंधन की कमी के साथ फ्रांस में खुदरा कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। 18 सितंबर को डीजल की औसत कीमत करीब 2.38 यूरो प्रति लीटर थी, जबकि विभिन्न स्रोतों के अनुसार यह 2.39 यूरो प्रति लीटर के स्तर को पार कर चुकी है। 700 से अधिक पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत 2.50 यूरो प्रति लीटर से अधिक दर्ज की गई, जबकि करीब 70 स्थानों पर यह 2.70 यूरो प्रति लीटर से भी ऊपर पहुंच गई।


फ्रांस के विभिन्न क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता की स्थिति अलग-अलग है। सरकारी आंकड़ों में ग्रां एस्त क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 18 सितंबर की सुबह 16 प्रतिशत पेट्रोल पंपों पर कम से कम एक ईंधन की आपूर्ति में दिक्कत थी। सेंटर-वाल द लोआर और ऑक्सितानी में यह आंकड़ा 14-14 प्रतिशत तथा पेई द ला लोआर में 13 प्रतिशत रहा। इसके अलावा बुर्गोनी-फ्रांश-कोंते में 12 प्रतिशत और ओ-दे-फ्रांस में 9 प्रतिशत पेट्रोल पंप प्रभावित पाए गए।


ईंधन की उपलब्धता को लेकर आशंका बढऩे के कारण कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। आपूर्ति में देरी और कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ परिवहन तथा ईंधन पर निर्भर पेशेवर क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ रहा है।


फ्रांस सरकार की ईंधन उपलब्धता संबंधी गणना की एक सीमा भी सामने आई है। किसी पेट्रोल पंप को आपूर्ति संकट से प्रभावित तब माना जाता है, जब वहां कम से कम एक प्रकार का पेट्रोल या डीजल उपलब्ध न हो। पेट्रोल की श्रेणी में भी अलग-अलग प्रकार के ईंधन की उपलब्धता के आधार पर आंकड़ा तय किया जाता है। इसलिए यदि किसी पंप पर एक विशेष श्रेणी का ईंधन खत्म हो गया है, लेकिन अन्य श्रेणियां उपलब्ध हैं, तो वह पंप पूर्ण रूप से खाली नहीं माना जाता। इस वजह से वास्तविक स्तर पर उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी सरकारी आंकड़ों से अधिक हो सकती है।


बढ़ती ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति संबंधी संकट के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जी-7 देशों की बैठक बुलाने की घोषणा की है। बैठक में ऊर्जा संकट, वैश्विक आपूर्ति की स्थिति और रणनीतिक तेल भंडार के इस्तेमाल जैसे विकल्पों पर चर्चा की जाएगी। मैक्रों ने ऊर्जा बाजार को स्थिर करने और आपूर्ति सुरक्षा मजबूत करने के लिए जी-7 देशों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।


फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाली आपूर्ति में व्यवधान ने ऊर्जा बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। फ्रांस अपनी डीजल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में किसी भी बड़ी बाधा का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।


ईंधन की बढ़ती कीमतों से प्रभावित पेशेवर क्षेत्रों को राहत देने के लिए फ्रांसीसी सरकार ने सहायता उपायों को जारी रखने की दिशा में कदम उठाए हैं। मछुआरों, किसानों और निर्माण क्षेत्र जैसी ईंधन-निर्भर गतिविधियों के लिए सहायता बढ़ाने के उपाय किए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास आपूर्ति बनाए रखने के साथ कीमतों के बढ़ते दबाव को सीमित करना है।


फ्रांस में पैदा हुआ यह संकट ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पहले ही दबाव में है। ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता का असर यूरोप के अन्य देशों पर भी पड़ रहा है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में ईंधन लागत तथा परिवहन खर्च बढऩे की आशंका बनी हुई है।


Share This Article