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नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026। Supreme Court : देशभर में आवारा मवेशियों के लिए आश्रय स्थल बनाने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की याचिका पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने पर सहमति जताई है। NHAI ने अदालत के समक्ष कहा है कि यदि उसे देशभर में ऐसे आश्रय स्थलों के निर्माण और व्यवस्था की जिम्मेदारी दी जाती है, तो अनुमानित खर्च करीब 7,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

NHAI ने कहा- स्थानीय प्रशासन को दी जाए जिम्मेदारी

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने NHAI की आपत्ति रखी। प्राधिकरण का कहना है कि आवारा मवेशियों के लिए आश्रय स्थलों का निर्माण और संचालन स्थानीय निकायों तथा जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए। NHAI ने देशभर में इस व्यवस्था को अपने स्तर पर लागू करने को व्यावहारिक चुनौती बताया है।

7 हजार करोड़ रुपये तक खर्च का अनुमान

NHAI की ओर से अदालत को बताया गया कि देशभर में आवारा मवेशियों के लिए आश्रय स्थल बनाने और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं पर करीब 7,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्राधिकरण ने इसी आधार पर जिम्मेदारी के बंटवारे पर दोबारा विचार करने की मांग की है।

विशेष पीठ के गठन का रास्ता साफ

सॉलिसिटर जनरल ने इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष पीठ के गठन की मांग की। उन्होंने पहले गठित विशेष पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई की मांग भी रखी। दलीलें सुनने के बाद प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि पीठ का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही NHAI की याचिका पर विशेष पीठ में सुनवाई का रास्ता साफ हो गया।

आवारा पशुओं से जुड़े मामलों के बीच उठा मुद्दा

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों और मवेशियों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत पहले भी हाईवे और एक्सप्रेसवे पर आवारा मवेशियों से सड़क सुरक्षा को होने वाले खतरे तथा उन्हें हटाकर उपयुक्त आश्रय स्थलों तक पहुंचाने से जुड़े निर्देशों पर विचार कर चुकी है।

अब जिम्मेदारी और खर्च पर होगा फैसला

अब विशेष पीठ NHAI की उस आपत्ति पर विचार करेगी, जिसमें देशभर में आवारा मवेशियों के लिए आश्रय स्थल बनाने से जुड़ी जिम्मेदारी और उससे होने वाले खर्च का मुद्दा उठाया गया है। सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट हो सकता है कि आश्रय स्थलों के निर्माण, संचालन और पशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी NHAI, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों या संबंधित अन्य एजेंसियों के बीच किस तरह तय की जाए।


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