Saur Sujala YojanaSaur Sujala Yojana
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रायपुर, 23 सितंबर 2026/ETrendingIndia / दंतेवाड़ा जिले के ग्राम मुरकी निवासी किसान श्री चरण सिंह ठाकुर के लिए सौर सुजला योजना खेती में नई संभावनाओं का आधार बनी है। योजना के तहत स्थापित सोलर पंप से सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद उन्होंने न केवल अपनी कृषि गतिविधियों का विस्तार किया, बल्कि खेती के साथ मछली पालन को जोड़कर आमदनी का अतिरिक्त साधन भी तैयार किया है।

विकासखंड दंतेवाड़ा के ग्राम मुरकी में रहने वाले श्री ठाकुर पहले सिंचाई के लिए पारंपरिक साधनों और पानी की उपलब्धता पर निर्भर थे। पर्याप्त एवं नियमित सिंचाई सुविधा नहीं होने के कारण खेती का दायरा सीमित था। सौर पंप लगने से उनकी यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई। अब उन्हें सिंचाई के लिए बिजली अथवा डीजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और वे समय पर फसलों को पानी दे पा रहे हैं।

सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद श्री ठाकुर खरीफ और रबी, दोनों मौसमों में खेती कर रहे हैं। वे धान के साथ उड़द और अरहर जैसी दलहनी फसलें उगा रहे हैं। इसके अलावा लौकी, भिंडी, करेला, बरबट्टी सहित विभिन्न मौसमी सब्जियों का उत्पादन कर स्थानीय बाजार में बिक्री से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। फसलों में विविधता आने से उनकी खेती अधिक उपयोगी और लाभकारी हुई है।

श्री ठाकुर ने सौर पंप की सुविधा का उपयोग केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं रखा है। वे इसके माध्यम से तालाब में पानी की उपलब्धता बनाए रखते हुए मछली पालन भी कर रहे हैं। खेती और मछली पालन के समन्वित प्रयास से उपलब्ध भूमि एवं जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है और परिवार के लिए आय के अलग-अलग स्रोत विकसित हुए हैं। इन्हीं गतिविधियों के माध्यम से उनकी वार्षिक आमदनी में 80 से 90 हजार रुपये का इजाफा हुआ है।

श्री ठाकुर बताते हैं कि सोलर पंप ने खेती के प्रति उनका भरोसा बढ़ाया है। अब वे मौसम के साथ अलग-अलग फसलें और सब्जियां उगा पा रहे हैं। मछली पालन से भी अतिरिक्त आय मिल रही है। सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण पंप पर ईंधन का खर्च नहीं आता, जिससे खेती की लागत कम रखने में मदद मिलती है।
दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जिले में सौर सुजला योजना किसानों तक स्वच्छ ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा पहुंचाकर उनकी खेती को नया आधार दे रही है। श्री चरण सिंह ठाकुर का उदाहरण बताता है कि सिंचाई के भरोसेमंद साधन और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसान परंपरागत खेती से आगे बढ़कर बहुफसली कृषि, सब्जी उत्पादन और मछली पालन जैसी गतिविधियां अपनाते हुए अपनी आय बढ़ा सकते हैं।


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