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रायपुर / ETrendingIndia / भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025 , राज्यसभा से पारित हुआ नया विधेयक

राज्यसभा ने सोमवार को भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025 पारित कर दिया। इसके साथ ही 1908 से लागू औपनिवेशिक कानून समाप्त हो गया। यह विधेयक लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका है और अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है।

सुधार की दिशा में बड़ा कदम

केंद्रीय पोत, जलमार्ग एवं बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसे “ऐतिहासिक सुधार” बताया। उन्होंने कहा कि बंदरगाह केवल सामान के प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि विकास और रोजगार के इंजन भी हैं। यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दृष्टि को दर्शाता है, जिसमें औपनिवेशिक ढांचों को खत्म कर भारत को वैश्विक मानकों से जोड़ा जा रहा है।

समुद्री क्षेत्र की उपलब्धियां

पिछले दशक में समुद्री क्षेत्र ने तेज प्रगति की है। प्रमुख बंदरगाहों पर कार्गो हैंडलिंग 2014-15 के 581 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 855 मिलियन टन तक पहुंच गई। क्षमता में 87% वृद्धि हुई। जहाजों की टर्नअराउंड समय घटकर 48 घंटे रह गया, जो वैश्विक मानकों के बराबर है। तटीय शिपिंग और आंतरिक जलमार्गों पर कार्गो परिवहन में भी कई गुना वृद्धि हुई है।

नए प्रावधान और लाभ

नया विधेयक Maritime State Development Council के गठन का प्रावधान करता है, जो केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करेगा। राज्यों को अपने Maritime Boards बनाने का अधिकार मिलेगा। विवाद निवारण समितियां और पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन अनिवार्य किया गया है। साथ ही, डिजिटलीकरण पर जोर देते हुए Maritime Single Window और उन्नत ट्रैफिक सिस्टम लागू होंगे।

वैश्विक मानकों की ओर भारत

सोनोवाल ने कहा कि यह सुधार भारत को सिंगापुर, यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा करेगा। यह विधेयक सहकारी संघवाद को मजबूत करता है और भारत को 2047 तक वैश्विक समुद्री शक्ति बनाने की दिशा में ले जाता है।