National Lata Mangeshkar AwardNational Lata Mangeshkar Award
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रायपुर, 29 सितंबर 2026 / ETrendingIndia / इंदौर में आयोजित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान-2026 से सुप्रसिद्ध संगीत निर्देशक शान्तनु मोइत्रा को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव के स्वागत उद्बोधन और प्रशस्ति पत्र के वाचन से हुई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लता मंगेशकर के नाम पर दिया जाने वाला यह सम्मान बेहद प्रतिष्ठित है। साथ ही उन्होंने कहा कि लता मंगेशकर जैसी महान कलाकार की जन्मस्थली इंदौर होना मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है।

लता मंगेशकर के सुरों में जीवन के हर भाव की अभिव्यक्ति

मुख्यमंत्री ने कहा कि लता मंगेशकर ने भक्ति, देशभक्ति, प्रेम, दोस्ती और विरह सहित जीवन के अनेक भावों को अपनी आवाज दी। उनके गीत आज भी राष्ट्रीय पर्वों और धार्मिक उत्सवों में लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।

उन्होंने कहा कि लता जी ने 30 से अधिक भाषाओं और बोलियों में हजारों गीतों को आवाज दी। इसके अलावा शास्त्रीय, सुगम, भक्ति और लोक संगीत में भी उनकी गायकी की विविधता देखने को मिली।

शान्तनु मोइत्रा की संगीत साधना की सराहना

राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान से सम्मानित शान्तनु मोइत्रा की संगीत यात्रा की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सराहना की। उन्होंने कहा कि मोइत्रा ने अपनी प्रतिभा से भारतीय संगीत जगत को समृद्ध किया है।

मुख्यमंत्री ने उनके चर्चित गीतों और संगीत प्रस्तुतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मालवा की धरती प्रतिभाओं को सम्मान देने की परंपरा के लिए जानी जाती है। इसलिए यह आयोजन उस सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाता है।

लता मंगेशकर से मिली ईमानदारी और अनुशासन की सीख

सम्मान प्राप्त करने के बाद शान्तनु मोइत्रा ने मध्यप्रदेश शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लता मंगेशकर के नाम से सम्मानित होना उनके लिए भावुक और गौरवपूर्ण क्षण है।

मोइत्रा ने लता जी के साथ स्टूडियो में काम करने का संस्मरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि लता जी चार पंक्तियों के गीत के लिए भी पूरी तैयारी और समर्पण के साथ काम करती थीं। उनके अनुसार, लता जी से उन्हें ईमानदारी, अनुशासन और उत्कृष्टता की सीख मिली।

संगीत संध्या में सुरों ने बांधा समां

राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान समारोह के बाद संगीत संध्या का आयोजन किया गया। इसमें सचेत-परम्परा और उनके दल ने विभिन्न गीतों की प्रस्तुतियां दीं। इसके अलावा बड़ी संख्या में संगीत प्रेमियों और गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।


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