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रायपुर, 02 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में परमाणु ऊर्जा से संचालित विमानवाहक पोत यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट और उसके साथ वाहक युद्धक समूह-9 की तैनाती को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर कड़ा रुख अपना चुके हैं और मध्यावधि चुनाव के बाद युद्ध समाप्त होने की बात कह चुके हैं।


अमेरिकी नौसेना के अनुसार, यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट वाहक युद्धक समूह-9 का प्रमुख पोत है। 7 सितंबर को यह प्रशांत क्षेत्र में उन्नत प्रशिक्षण अभियान में सक्रिय था। उपलब्ध रिपोर्टों में पश्चिम एशिया की ओर इसकी संभावित तैनाती को लेकर चर्चा है।


यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट निमित्ज श्रेणी का चौथा परमाणु ऊर्जा चालित विमानवाहक पोत है। इसका नाम अमेरिका के 26वें राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट के सम्मान में रखा गया है। इसे 25 अक्टूबर 1986 को अमेरिकी नौसेना में शामिल किया गया था। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, निमित्ज श्रेणी के इस पोत की लंबाई करीब 333 मीटर और उड़ान डेक की चौड़ाई लगभग 76.8 मीटर है। इसका पूर्ण भार विस्थापन करीब 97 हजार टन है।


पोत की उड़ान पट्टी का क्षेत्रफल लगभग 4.5 एकड़ है। इस पर 65 से अधिक विमान तैनात किए जा सकते हैं। इसमें लड़ाकू विमानों के अलावा निगरानी और हेलीकॉप्टर भी शामिल होते हैं।


यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट दो परमाणु रिएक्टरों से संचालित होता है। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, निमित्ज श्रेणी के पोतों में चार शाफ्ट वाली परमाणु प्रणोदन प्रणाली है और इनकी गति 30 समुद्री मील से अधिक हो सकती है। परमाणु ऊर्जा के कारण ऐसे विमानवाहक पोतों को लंबे समय तक समुद्र में अभियान चलाने की क्षमता मिलती है।

इस पर सामान्य रूप से करीब 3,200 नौसैनिकों के अलावा लगभग 2,480 सदस्यीय वायु दल तैनात हो सकता है। विमानवाहक पोत पर तैनात वायु शाखा में एफ/ए-18ई सुपर हॉर्नेट जैसे लड़ाकू विमान, ई-2डी हॉकआई जैसे हवाई चेतावनी एवं नियंत्रण विमान तथा विभिन्न प्रकार के हेलीकॉप्टर शामिल होते हैं।


यह विमानवाहक पोत केवल लड़ाकू विमानों के संचालन का केंद्र नहीं है, बल्कि इसकी अपनी सुरक्षा के लिए भी कई हथियार प्रणालियां मौजूद हैं। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, निमित्ज श्रेणी के पोतों में सी स्पैरो, रोलिंग एयरफ्रेम मिसाइल और निकटवर्ती रक्षा प्रणाली जैसी हथियार प्रणालियां लगाई जाती हैं।


यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट विभिन्न प्रकार के अभियानों में हवाई युद्ध, समुद्री सतह पर युद्ध, पनडुब्बी रोधी अभियान और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी भूमिकाएं निभाने में सक्षम है।


यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट अकेले अभियान नहीं करता। इसके साथ वाहक युद्धक समूह-9 में विमानवाहक पोत के अलावा निर्देशित मिसाइलों से लैस युद्धपोत, विध्वंसक और वायु शाखा के विमान शामिल होते हैं। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, रूजवेल्ट पहले भी मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति मजबूत करने वाले अभियानों का हिस्सा रह चुका है।


वर्तमान समय में पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य तैनाती का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान के साथ संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ा हुआ है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में संभावित बढ़ोतरी की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर में कहा था कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद समाप्त हो सकता है। साथ ही उन्होंने तेहरान पर दबाव बनाए रखने की बात कही थी।
26 सितंबर को ट्रंप ने ईरान की ओर से सात दिन के संघर्षविराम और होर्मुज जलडम

रूमध्य को फिर से खोलने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। ईरान की ओर से मध्यस्थों के माध्यम से यह प्रस्ताव सामने रखा गया था।
ऐसे में पश्चिम एशिया में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों और अतिरिक्त सैन्य संसाधनों

तैनाती पर पूरी दुनिया की नजर है। हालांकि, यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट की किसी संभावित तैनाती को लेकर अंतिम परिचालन उद्देश्य और समयसीमा का आकलन आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर ही किया जा सकेगा।


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