Share This Article रायपुर, 07 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद के मुद्दे पर इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की टिप्पणियों को लेकर कड़ा जवाब दिया। भारत ने कहा कि ओआईसी तथ्य और कल्पना में अंतर करने के साथ-साथ पीडि़त और अपराधी के बीच अंतर करने में भी असमर्थ दिखाई देता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद उन्मूलन उपायों से संबंधित छठी समिति में बोलते हुए लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देब ने कहा कि भारत को पाकिस्तान से होने वाले सीमापार आतंकवाद से अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और आतंकवाद में संलिप्त लोगों को इसके परिणाम भुगतने होंगे। संयुक्त राष्ट्र में परिचय सप्ताह के लिए पहुंचे सांसदों के 15 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल देब ने अपने संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ भारत की व्यापक नीति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने कड़वे अनुभवों के कारण जानता है कि आतंकवाद कोई दूर की समस्या नहीं, बल्कि उसके लिए दैनिक वास्तविकता है। देब ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को जल्द से जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने, प्रचार, अपने अभियानों और वित्तपोषण के लिए तेजी से उभरती तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी और एकजुट कार्रवाई के लिए ठोस व्यवस्था विकसित करनी होगी। देब ने सऊदी अरब की ओर से ओआईसी के अध्यक्ष के रूप में दिए गए बयान का भी कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने पाकिस्तान और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की लक्षित और संयमित कार्रवाई पर ओआईसी की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ओआईसी के बयान में दक्षिण-पूर्व एशिया में सैन्य तनाव बढऩे और पाकिस्तान के कई स्थानों पर कथित अनुचित हमलों का उल्लेख किया गया था, लेकिन उसमें भारत का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया। देब ने कहा कि इस तरह के बयान वास्तविक परिस्थितियों और आतंकवाद से प्रभावित पक्षों के बीच अंतर करने में संगठन की विफलता को दर्शाते हैं। जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में ओआईसी की टिप्पणी को अनुचित बताते हुए देब ने कहा कि संगठन को पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से रावलकोट का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां अंधाधुंध हत्याओं और हिंसा की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की जानबूझकर अनदेखी कट्टरता और असहिष्णुता को बढ़ावा देती है। देब ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कई महीनों से विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी प्रकार के दोहरे मानदंड से बचने और आतंकवादियों तथा उनके पीडि़तों के बीच स्पष्ट अंतर करने का आह्वान किया। भारत ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि सीमापार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई उसके नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के अधिकार का हिस्सा है। भारत का कहना है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों तथा उन्हें समर्थन देने वालों को इसके परिणाम भुगतने होंगे। Share This Article Post navigation रूस ने साइबेरिया में प्लेग से किया इनकार, डब्ल्यूएचओ ने अज्ञात निमोनिया की जानकारी मांगी हूतियों ने अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किया हमला, दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें