SEBI New Rule 2026SEBI New Rule 2026
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रायपुर, 10 अक्टूबर 2026। SEBI New Rule 2026 : बॉन्ड और अन्य डेट सिक्योरिटीज में निवेश करने वालों के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नया क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर पेश किया है। इस व्यवस्था के तहत हरे से लाल रंग तक के संकेतों के जरिए निवेशक किसी डेट सिक्योरिटी से जुड़े क्रेडिट जोखिम को आसानी से समझ सकेंगे। सेबी के 7 अक्टूबर 2026 को जारी सर्कुलर के अनुसार, यह व्यवस्था सर्कुलर जारी होने के 45 दिन बाद लागू होगी।

छह श्रेणियों में दिखेगा क्रेडिट जोखिम

सेबी ने क्रेडिट रेटिंग के आधार पर डेट सिक्योरिटीज के जोखिम को छह श्रेणियों में बांटा है। AAA रेटिंग सबसे कम क्रेडिट जोखिम दर्शाती है, जबकि AA बहुत कम और A कम जोखिम का संकेत देती है। BBB को मध्यम क्रेडिट जोखिम की श्रेणी में रखा गया है। BB रेटिंग डिफॉल्ट के मध्यम जोखिम को दर्शाती है, जबकि B से D तक की रेटिंग उच्च से बहुत अधिक डिफॉल्ट जोखिम का संकेत देती है।

हरे से लाल रंग तक होंगे जोखिम के संकेत

नए क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर में रंगों के माध्यम से जोखिम को समझना आसान बनाने की व्यवस्था की गई है। सबसे कम जोखिम को हरे रंग और सबसे अधिक जोखिम को लाल रंग से दिखाया जाएगा। इससे निवेशकों को संबंधित बॉन्ड की क्रेडिट रेटिंग और उससे जुड़े जोखिम का आकलन करने में मदद मिलेगी।

किन डेट सिक्योरिटीज पर लागू होगा नियम?

यह व्यवस्था शेयर बाजार में सूचीबद्ध या सूचीबद्ध होने वाली डेट सिक्योरिटीज पर लागू होगी। इसमें नॉन-कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, कमर्शियल पेपर, सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स, सिक्योरिटी रिसीट्स और स्ट्रक्चर्ड डेट सिक्योरिटीज शामिल हैं। नियम सार्वजनिक निर्गम और निजी प्लेसमेंट, दोनों पर लागू होंगे।

वेबसाइट, विज्ञापनों और निवेश दस्तावेजों में दिखाना होगा मीटर

नियम के तहत कंपनियों और ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म को निवेश से जुड़े दस्तावेजों, प्रॉस्पेक्टस, विज्ञापनों, वेबसाइट और मोबाइल प्लेटफॉर्म पर क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर प्रदर्शित करना होगा। बिना गारंटी वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए ‘UNSECURED’ शब्द गहरे लाल रंग में मोटे अक्षरों में लिखना अनिवार्य होगा।

रेटिंग बदलने पर 24 घंटे में करना होगा अपडेट

यदि किसी डेट सिक्योरिटी की क्रेडिट रेटिंग में बदलाव होता है, तो ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म को NSDL या CDSL से सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर रिस्क-ओ-मीटर अपडेट करना होगा। यदि किसी सिक्योरिटी को एक से अधिक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने रेटिंग दी है, तो मीटर में सबसे कम रेटिंग के आधार पर जोखिम दिखाया जाएगा।

निवेशकों के लिए यह व्यवस्था बॉन्ड से जुड़े क्रेडिट जोखिम को समझने का एक अतिरिक्त माध्यम होगी। हालांकि, केवल रंग या रेटिंग देखकर निवेश का निर्णय नहीं लेना चाहिए। ब्याज दर, बाजार में उतार-चढ़ाव और जरूरत पड़ने पर बॉन्ड बेचने की सुविधा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर अपने आप में निवेश की सलाह नहीं है।


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