Share This Article रायपुर, 14 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने पांच वर्षों में भारत में बुनियादी ढांचे की योजना बनाने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन का तरीका बदल दिया है। 13 अक्टूबर 2021 को शुरू हुई इस पहल के तहत अब 58 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों तथा सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर परियोजनाओं की लागत घटाना, काम में तेजी लाना और संपर्क सुविधाओं को मजबूत करना है। एक प्लेटफॉर्म पर 23,493 से अधिक डेटा लेयर पीएम गतिशक्ति जीआईएस आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिस पर बुनियादी ढांचे और भौगोलिक जानकारी को एक साथ देखा जा सकता है। 12 अक्टूबर 2026 तक इस पर 23,493 से अधिक डेटा लेयर उपलब्ध थीं। इसके सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर 230 स्वीकृत डेटासेट के जरिए परियोजनाओं के लिए उपयुक्त स्थान, मार्ग और संपर्क सुविधाओं का आकलन किया जा सकता है। 18.66 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का मूल्यांकन नेटवर्क नियोजन समूह ने 11 अगस्त 2026 तक लगभग 18.66 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 396 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया था। इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी थी और 198 परियोजनाएं क्रियान्वयन के चरण में थीं। एकीकृत परिवहन योजना को मिलेगा बढ़ावा केंद्र सरकार ने एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (ITLA) की स्थापना को मंजूरी दी है। यह प्राधिकरण दीर्घकालिक परिवहन योजनाएं तैयार करने, 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक की परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करने और उनके क्रियान्वयन की निगरानी में भूमिका निभाएगा। पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे से समय और ईंधन की बचत 699 किलोमीटर लंबे पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे के 2027-28 तक पूरा होने की उम्मीद है। इससे यात्रा के समय में 7 से 8 घंटे की कमी आने और प्रतिवर्ष लगभग 16 करोड़ लीटर ईंधन बचने का अनुमान है। परियोजना की योजना बनाते समय वन भूमि पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए मार्ग में संशोधन भी किया गया है। पूर्वोत्तर में मजबूत होगी माल परिवहन व्यवस्था असम के जोगीघोपा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क को सड़क, रेल और अंतर्देशीय जलमार्गों से जोड़ने की योजना है। वहीं, धुबरी-फूलबाड़ी के बीच बन रहे चार लेन के पुल से यात्रा की दूरी 205 किलोमीटर से घटकर 20 किलोमीटर होने और समय लगभग सात घंटे से घटकर 30 मिनट होने की उम्मीद है। 13 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ग्रीन कॉरिडोर लद्दाख के पांग से हरियाणा के कैथल तक प्रस्तावित 480 किलोमीटर लंबी उच्च वोल्टेज पारेषण लाइन के जरिए नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने में मदद मिलेगी। परियोजना को वित्त वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 2.4 लाख से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण गतिशक्ति विश्वविद्यालय परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित कर रहा है। जुलाई 2026 तक विश्वविद्यालय ने पीएम गतिशक्ति से संबंधित पाठ्यक्रमों के माध्यम से 2.4 लाख से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया था। क्या होगा फायदा? पीएम गतिशक्ति से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर होने, परियोजनाओं की योजना बनाने में लगने वाला समय घटने, लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और उद्योगों व आर्थिक केंद्रों तक संपर्क सुविधाएं बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह पहल देश में आधुनिक, एकीकृत और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। Share This Article Post navigation NH-130 : दुर्घटना प्रबंधन में लापरवाही… NHAI ने रखरखाव एजेंसी पर लगाया ₹10 लाख का जुर्माना समिति प्रबंधकों और फड़मुंशियों को मिलेगी 2-2 लाख रुपए की सामाजिक सुरक्षा बीमा